गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव के लिए थमा प्रचार, 11 को होगा मतदान

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गोरखपुर। यूपी के दो संसदीय क्षेत्र गोरखपुर और फूलपुर में उपचुनाव चुनावों के लिए प्रचार अभियान शुक्रवार शाम थम गया। इन दोनों सीटों पर 11 मार्च को वोट डाले जाएंगे। इसके नतीजे 14 मार्च को घोषित होंगे। इस उप चुनाव के लिए बीजेपी जी तोड़ मेहनत कर रही है। सपा-बसपा के गठजोड़ के बाद तो उनकी लड़ाई और भी मुश्किल हो गई है। पार्टी के तमाम आला नेता सपा-बसपा दोस्ती को लगातार हमलावर हैं।

बीजेपी

यह चुनाव सभी पार्टियों के लिए एक महायुद्ध बनी हुयी है। योगी आदित्यनाथ के लिए ये चुनाव के चुनौती है। गोरखपुर की सीट पर पांच साल तक उनका कब्ज़ा रहा है। अब मुख्यमंत्री के बनने के बाद सबसे बड़े नेता बनकर उभरें हैं। ऐसे में पार्टी को बहुत सी उम्मीदें हैं।

वहीँ कांग्रेस, एसपी और बीएसपी तीनों इस चुनाव के जरिए अपनी मजबूती टेस्ट करना चाहते हैं। सपा इस चुनाव के जरिये एक बार फिर खड़े होने की कोशिश करेगी। एक बार फिर इस चुनाव में मुख्य तौर पर जाति कार्ड पर ही जोर है।

गोरखपुर सीट बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

1952 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजयनाथ 1967 निर्दलीय चुनाव जीता। इस सीट पर 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। 1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल तो कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा।

उसके बाद 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की। 1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल तो कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा। 1989 के बाद से इस सीट पर गोरक्षपीठ का कब्ज़ा रहा। महंत अवैद्यनाथ 1998 तक सांसद रहे। उनके बाद 1998 से लगातार पांच बार योगी आदित्यनाथ का कब्ज़ा रहा।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर और फूलपुर में  11 मार्च को मतदान होगा। जबकि 14 मार्च को परिणाम घोषित किये जायेंगे।

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