अब अपने ही फैसले से पलटी योगी सरकार, किया ये बड़ा ऐलान

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लखनऊ। अब उत्तर प्रदेश में बिजली का निजीकरण नहीं करने का फैसला लिया है। बिजली कर्मचारियों की मांगों के सामने झुकते हुए योगी सरकार ने गुरुवार को अपना ही फैसला बदल दिया है। वहीँ इसका विरोध कर रहे कर्मचारियों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। योगी सरकार ने भी इंटीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर के लिए जारी की गई निविदा (टेंडर) को वापस ले लिया है।

योगी सरकार

आठ घंटे तक प्रमुख सचिव ऊर्जा और संघर्ष समिति के बीच चली बैठक के बाद सरकार के साथ लिखित समझौता हुआ।आपको बता दें कि राज्य सरकार ने बिजली विभाग का निजीकरण करने की तैयारी कर ली थी। जिसके बाद इस साल फ़रवरी में ही रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया और सहारनपुर के निजीकरण करने के लिए टेंडर भी निकाल दिया गया था। इसके बाद मार्च में निजी हाथों में दिया जाना था लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद ये फैसला बदल दिया गया।

लिखित समझौते के दौरान ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा मौजूद रहे। समझौते पर प्रबंधन की ओर से प्रमुख सचिव (ऊर्जा) एवम् अध्यक्ष उप्र पावर कॉरपोरेशन लि। आलोक कुमार, प्रबन्ध निदेशक अपर्णा यू और निदेशक कार्मिक एसपी पाण्डेय ने हस्ताक्षर किए

समझौते के मुताबिक….

सात जनपदों रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया और सहारनपुर के निजीकरण के लिए जारी टेंडर वापस ले लिए गए हैं।
सरकार बिना कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिए यूपी के किसी भी जगह का निजीकरण नहीं करेगी

उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए कर्मचारियों और अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई की जाएगी।

जो लम्बे समय से चली आरही हैं समस्याएं हैं उनका दोनों पक्षों की राय से ही समाधान किया जायेगा।

साथ ये भी कहा गया है जो कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल थे उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी।

आपको बता दें कि इससे पहले अपनी मांगों को लेकर बिजली विभाग एक कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी। कर्मचारियों की बात सुनते हुए सरकार ने बिजली निजीकरण कारन नहीं करना का फैला लिया।     

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