सरकार के खिलाफ हल्ला बोल, आज बंद रहेंगे राजधानी के सभी निजी स्कूल

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लखनऊ। स्कूलों के मनमानी फीस वसूलने को लेकर सरकार ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वहीँ निजी स्कूलों ने सरकार ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। सरकार का विरोध करने के लिए स्कूलों ने फैसला लिया है कि वो 7 अप्रैल को बंद रहेंगे। इसमें लखनऊ शहर के 65 निजी और मिशनरी स्कूल शामिल हैं। वहीं दिल्ली के रामलीला मैदान में कई स्कूली संगठन प्रदर्शन भी करेंगे।

निजी स्कूलोंस्कूलों का आरोप है कि निजी स्कूलों पर सरकार अपना नियंत्रण करना चाहती है। इसके अलावा राइट टु एजुकेशन के गलत क्रियान्वयन और स्कूल कर्मियों की ढीली सुरक्षा व्यवस्था के विरोध में स्कूल बंद रखने का फैसला लिया है। असोसिएशन की सदस्य गीता गांधी ने बताया कि राइट टु एजुकेशन के तहत स्कूलों में भेजे जा रहे 80% से अधिक बच्चे इसके पात्र नहीं है।

एक्ट के मुताबिक इसमें 6 से 14 साल के बच्चों को दाखिला लिया जाता है जबकि सरकार इससे कम उम्र के बच्चों को भेजती है। साथ ही फीस के तौर पर 450 रु/ प्रति माह प्रति बच्चे के हिसाब से दिए जाते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर सरकार कितना खर्च करती है वह इसका ऑडिट नहीं करवाती। नियम के तहत स्कूल की फीस और सरकारी खर्च में जो कम है वह दिया जाना चाहिए।

सरकार ने लिया फैसला 

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को लेकर किया गया। इस बैठक में फैसला लिया गया कि अगर कोई स्कूल मानकों से ऊपर फीस वसूल करती है तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जायेगी। सरकार का दावा है कि इस विधेयक के अमल में आने के बाद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी।

इस बारे में जानकारी देते हुए सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया था कि विद्यालय के शुल्क लेने की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और कोई भी स्कूल सिर्फ चार तरह से ही शुल्क ले सकेंगे, जिसमें विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल है।

अगर कोई वैकल्पिक सुविधा जैसे वाहन, होस्टल, भ्रमण व कैंटीन की सुविधा लेता है, तभी शुल्क देना होगा। हर तरह के शुल्क की रसीद देना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।

ड्रेस 5 साल तक नहीं बदलेगी

उन्होंने बताया कि इन नियमों के दायरे में सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड द्वारा संचालित स्कूलों को भी लिया गया है। साथ ही कोई भी स्कूल बच्चों की ड्रेस में पांच वर्ष तक बदलाव नहीं कर सकेगा और न ही जूते-मोजे किसी दुकान से लेने के लिए बाध्य कर सकेगा।

अभिवाहकों को रहत मिलेगी शर्मा ने बताया कि निजी विद्यालय में किसी भी कमर्शियल कार्य से जो आय होगी, उसे विद्यालय की आय माना जाएगा। सरकार के इन फैसलों से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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