भारत में DNA टेस्ट के जनक और BHU के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का निधन

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लखनऊ। भारत के मशहूर डीएनए वैज्ञानिक और बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह हैदराबाद के सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति दिल्ली जा रहे थे, लेकिन रविवार देर रात को उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री हवाईअड्डे पर सीने में तीव्र दर्द की शिकायत की। उन्हें फौरन बीएचयू अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

वह 1998 से 2009 के बीच सीसीएमबी के निदेशक भी रहे

उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले लालजी हैदराबाद में स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर और मॉलिक्युलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के संस्थापक थे। उन्हें अंडमान एवं निकोबार में आदिवासियों के लिए काम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति भी मिली। वह 1998 से 2009 के बीच सीसीएमबी के निदेशक भी रहे। साल 2011 में वह बीएचयू के कुलपति बने और 2014 तक बने रहे।

1971 में पीएचडी करने के बाद कोलकाता गए

1971 में पीएचडी करने के बाद कोलकाता गए, जहां साइंस में 1974 तक एक फैलोशिप के तहत रिसर्च किया।  इसके बाद वे फैलोशिप पर ब्रिटेन गए, और 9 महीने बाद वापस भारत आए। उन्होंने जून 1987 में सीसीएमबी हैदराबाद में साइंटिस्ट की पोस्ट पर काम करना शुरू किया। 1998 से 2009 तक वहां के डायरेक्टर रहे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लालजी के निधन पर जताया शोक

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लालजी के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उनके निधन से देश ने एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और बेहतरीन शिक्षक खो दिया है। मुख्यमंत्री की ओर से सोमवार को जारी शोक संदेश में कहा गया कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद लालजी ने शिक्षा ग्रहण की और शिखर पर पहुंचे और नई पीढ़ी के अनुकरण के लिए उदाहरण छोड़ गए।

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