FSOI की रिपोर्ट: उत्तराखंड में हर रोज सिमट रहा वन क्षेत्र

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देहरादून। वन क्षेत्रों का आकड़ा एकत्रित करने वाली रिसर्च आर्गेनाइजेशन फारेस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया ने 2017 की रिपोर्ट जारी की है। हर दो साल में जारी होने वाली रिपोर्ट उत्तराखंड के लिए काफी चौकाने वाली है।

रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में विकास कार्यों और निरंतर कटान के चलते संरक्षित और सिविल वन क्षेत्रफल में 49 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की कमी आई है। इसके विपरीत नॉन फारेस्ट एरिया में 23 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में जरूर वनीकरण हुआ है। सिविल और संरक्षित वन क्षेत्रफल में आई ये कमी बेहद चिंताजनक है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने जो नए आंकड़े जारी किये हैं, उनके मुताबिक देश में कुल वन क्षेत्रफल बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है। ये देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.54 प्रतिशत है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ये रिपोर्ट बताती है कि वन क्षेत्रफल में सबसे अधिक कमी पहाड़ी क्षेत्रों में ही देखने को मिली है। उत्तराखंड से हर जिले के वन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है।

नैनीताल जिले में करीब 3,500 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल वन क्षेत्र की गिरावट दर्ज की गई है, तो उत्तरकाशी 2,600 हेक्टयेर वर्ग किमी क्षेत्रफल वन, चमोली 1,500 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल, ऊधमसिंह नगर में 1,400 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल, चम्पावत 1,100 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल, बागेश्वर एक हजार हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल, पिथौरागढ़ 500 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल और हरिद्वार में 300 हेक्टेयर वर्ग किमी क्षेत्रफल की कमी दर्ज की गई है।

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