रिसर्च : अस्थमा या अर्थराइटिस जैसी बीमारी से ग्रस्त बच्चों को दिमागी रोग होने का खतरा

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नई दिल्ली। अगर आपका बच्चा दिमागी तौर पर बीमार है तो उसके पीछे का कारण कोई पुरानी बीमारी हो सकती है। एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो बच्चे अपने जन्म के बाद से अस्थमा या अर्थराइटिस जैसी बीमारी से ग्रस्त होते हैं उन्हें आगे चलकर दिमागी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है। लेकिन अगर वक्त पर बीमारी का पता चल जाए तो उन्हें इस तकलीफ से बचाया जा सकता है।

58 प्रतिशत बच्चों में कम से कम एक दिमागी रोग होने की बात सामने आई

कनाडा की वॉटरलू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 6 से लेकर 16 साल तक के बच्चों का सर्वे किया। ये सर्वे उन बच्चों के साथ किया गया जिन्हें अस्थमा, फूड एलर्जी, डायबिटीज और अर्थराइटिस जैसी कोई बीमारी थी। सर्वे के बाद जब इनके मां-बाप से पूछा गया तो 58 प्रतिशत बच्चों में कम से कम एक दिमागी रोग होने की बात सामने आई।

वक्त पर बीमारी का इलाज करने से बच सकता है बच्चा

हालांकि इस रिसर्च से जुड़े एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘चाहे फिजिकल बीमारी की बात हो या दिमागी बीमारी की, अगर बच्चों में इनका पता छह महीने के अंदर ही चल जाए तो उनकी जिंदगी कम तकलीफदेय होती है।’ रिसर्च में देखा गया कि दिमागी बीमारी के पता लगने के छह महीने के बाद उन बच्चों में उस बीमारी में 42 प्रतिशत की कमी आई। यानि अगर समय से बीमारी का पता लगाकर उसका इलाज किया जाए तो बच्चों को जिंदगीनभर के लिए ये तकलीफ नहीं होती।

इस रिसर्च में पता लगा कि बच्चों को अलगाव वाला तनाव, साधारण तनाव और फोबिया जैसे दीमागी रोग आमतौर पर होते हैं। रिसर्च से जुडे़ एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि जितना जरूरी बच्चों में इन तनाव का पता लगाना है उतना ही जरूरी उनको सही सुझाव और मदद प्रदान करना भी है।

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