रिसर्च : अंतरिक्ष में तैर रहा ‘टाइटन’ पृथ्वी के जैसा ही है

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नई दिल्ली। नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने शनि के चंद्रमा का वैश्विक मानचित्र तैयार कर लिया है। इसे तैयार करने के बाद वै‍ज्ञानिकों ने दावा किया है कि टाइटन और पृथ्वी की भौगोलिक विशेषतायें काफी मिलती-जुलती है। वैश्विक मानचित्र तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने कसीनी अंतरिक्षयान से मिले हुये डेटा का प्रयोग किया है।

टाइटन की स्थलाकृतियों की उंचाई और गहराई का वैश्विक चित्रण है

इस मैप पर टाइटन की स्थलाकृतियों की उंचाई और गहराई का वैश्विक चित्रण है। इसके आधार पर वैज्ञानिक ये पुष्टि कर पाने में सफल हुये कि टाइटन के भूमध्यरेखा क्षेत्र में स्थित दो जगहें वास्तव में गड्ढें हैं जो या तो काफी पुराने हैं या फिर सूखे हुये समुद्र है। बता दें कि इस मैप में अलग-अलग सोर्स से मिली टाइटन की स्थलाकृतियों को शामिल किया गया है।

टाइटन के बारे में वैज्ञानिकों की जैसी समझ पहले थी

इस मैप के आधार पर ये बात सामने आई है कि टाइटन के बारे में वैज्ञानिकों की जैसी समझ पहले थी, ये उससे ज्यादा चपटा और समतल है। साथ ही इसके आवरण की मोटाई भी पहले की तुलना में ज्यादा अलग है। रिसर्च में ये भी सामने आया है कि शनि ग्रह के चंद्रमा के तीन समुद्र समान समतल सतह साझा करते हैं।

टाइटन में दुनिया को बसाया जा सकता है

बहुत कम लोग जानते होंगे की टाइटन नाम का चंद्रमा शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है और पृथ्वी के अलावा एकमात्र ऐसा खगोलीय पिंड है, जिसके सतही तरल स्थानों, जैसे नहरों, सागरों आदि के ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं। कहा ये भी जाता है कि यहां जीवन जीने की पूरी संभावना है और आने वाले समय में दुनिया को बसाया जा सकता है।

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