एक नये रुतबे के साथ लौट रही है शान की सवारी एंबेसडर गाड़ी

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नई दिल्ली। एक समय में शान और रुतबे का दूसरा नाम एंबेसडर गाड़ी को माना जाता था। एंबेसडर ज्यादातर बड़े-बड़े नेताओं और बड़े सरकारी अधिकारियों के पास ही होती थी। एंबेसडर सम्मान और रौब का प्रतीक मानी जाती थी।

मगर बदलते जमाने के साथ मार्केट में नयी-नयी कंपनियों द्वारा सस्ती और ज्यादा माइलेज देने वाली कारों को लांच किया गया, जिस वजह से एंबेसडर बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान मोटर्स को इसका उत्पादन बंद करना पड़ा था।

फिर से भारत में लांच होगी एंबेसडर

मीड़िया रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी 2017 में फ्रांस की एक कंपनी पीएसए ग्रुप ने लगभग 80 करोड़ रुपये में एंबेसडर ब्रांड के अधिकार खरीद लिये थे। अब ये ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी भारत में एंबेसडर के प्रति लोगों का लगाव देखते हुए इसे फिर से भारत में लांच करने की तैयारी कर रही है।

2020 तक आ जाएगी भारत में एंबेसडर

सूत्रों के अनुसार एंबेसडर को भारत में लांच करने के उद्देश्य से पीएसए ग्रुप ने सीके बिड़ला ग्रुप के साथ 50-50 की साझेदारी की है। पिछले साल तमिलनाडु के होसुर में पीएसए ग्रुप और सीके बिड़ला ग्रुप ने अपने पावरट्रेन प्लांट की शुरुआत की थी। इस साझेदारी के तहत गाड़ी और पावरट्रेन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में 700 करोड़ रुपये का निवेश होना तय हुआ है। इस पावरट्रेन प्लांट की शुरुआती उत्पादन क्षमता लगभग 2 लाख यूनिट प्रति वर्ष होगी। इस प्लांट के साल 2019 तक शुरु होने की संभावना जतायी जा रही है। गाड़ियां साल 2020 तक सड़कों पर आ जायेगी।

हालांकि इस बार भारत में एंबेसडर की राह पहले जितनी आसान नहीं रहेगी, क्योंकि मार्केट में मारुति सुजुकी समेत अन्य बड़ी कंपनियों ने अपनी पकड़ मजबूती से बना रखी है।

एंबेसडर कार का है अपना इतिहास

मॉरिस ऑक्सफॉर्ड की डिजाइन पर आधारित एंबेसडर सबसे पहले साल 1958 में पेश की गयी थी। इसके लांच होते ही इस गाड़ी ने अपनी एक अलग रौबदार पहचान बना ली। उदारीकरण से पहले के दौर तक यह कार भारत की सबसे पसंदीदा कार बन चुकी थी।

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