यूपी की बम्पर जीत में छिपा बीजेपी की बड़ी हार का खतरा, कांग्रेस में ख़ुशी की लहर

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यूपी में निकाय चुनाव परिणाम में मीडिया की सुर्खियों में बीजेपी की जीत छाई रही। चुनाव परिणाम का एक दूसरा पहलू भी है कि प्रदेश के 16 बड़े जिलों में से 14 में भले ही बीजेपी ने मेयर का चुनाव जीता हो, लेकिन टू-टियर शहरों में यह आंकड़ा कुछ और ही है। दूसरे दर्जे के शहरों में हुए नगर पालिका परिषद चुनावों में बीजेपी को सिर्फ 35 फीसदी सीटों पर जीत मिली है और बीजेपी का वोट प्रतिशत महज 28.6 ही है।

यहां इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि 2014 के लोकसभा चुनावों में इन्हीं शहरों में बीजेपी को 42 फीसदी वोट मिले थे। विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी का वोट प्रतिशत इन शहरों में लगभग लोकसभा चुनाव के समान ही रहा था। अगर इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो कह सकते हैं कि बीजेपी के लिए यह जरूर एक चिंता की वजह हो सकती है। सत्ताधारी पार्टी के विरोधियों के लिए उत्तर प्रदेश से इस लिहाज से जरूर थोड़ी अच्छी खबर आ रही है। निकाय चुनावों में मेयर के चुनाव के लिए बीजेपी का वोट प्रतिशत लगभग 41.4 फीसदी रहा है। प्रदेश की तीन प्रमुख विपक्षी पार्टी एसपी, बीएसपी और कांग्रेस इस लिहाज से काफी पीछे हैं। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के पद पर भगवा पार्टी की जीत की कहानी बिल्कुल उलट है। भगवा पार्टी को 198 में से सिर्फ 70 सीटों पर जीत मिली है। हालांकि, यहां पार्टी का वोट शेयर 28.6 फीसदी है जो कि एसपी के वोट शेयर 21.7 से जरूर काफी अधिक है। इस अंतर के बाद भी मानना पड़ेगा कि मेयर चुनाव में बीजेपी ने जीत का जो आंकड़ा तय किया है यह उससे काफी कम है।

नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी के जीत का अंतर काफी कम है और यह पार्टी के लिए 2019 लोकसभा चुनावों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती जरूर है। रुहेलखंड और सेंट्रल यूपी में बीजेपी से अधिक सीटें एसपी को मिली हैं और सेंट्रल यूपी में तो एसपी का वोट शेयर भी अधिक है। 2014 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने इन दोनों क्षेत्रों में विरोधियों से काफी बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की थी।

प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में बीजेपी के वोट शेयर को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि एसपी फिर से एक बार पार्टी के लिए चुनौती बनती जा रही है। दो क्षेत्रों में एसपी ने अपनी मजबूत पकड़ दर्ज की है और पश्चिमी यूपी, उत्तर-पूर्व के जिले और बुंदेलखंड में 20 फीसदी वोट शेयर के साथ अपनी पहुंच बताई है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीएसपी की पकड़ दिख रही है, लेकिन प्रदेश के बाकी हिस्सों में अभी एसपी ही मुख्य विकल्प के तौर पर नजर आ रही है। मेयर चुनावों में कांग्रेस को भले मुंह की खानी पड़ी हो, लेकिन छोटे शहरों और कस्बों में उसके पुनर्जीवन की संभावना जरूर नजर आ रही है।

साभार-navbharattimes.indiatimes.com (नवभारत टाइम्स )

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