वैज्ञानिकों का दावा, मृत तारे के आसपास हवा के बुलबुले बनने से बना सौरमंडल

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नई दिल्ली। अभी तक किसी वैज्ञानिक के पास इस बात का ठोस जवाब नहीं था कि सौरमंडल कैसे बना है। लेकिन अभी हाल में ही हुए एक रिसर्च में ये दावा किया गया है कि एक बहुत बड़े लंबे समय से मृत तारे के आसपास हवा के बुलबुले बनने से सौरमंडल बना। ये रिसर्च अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी ने किया है।

धूल और गैस इसके अंदर फंसकर तारों में बदल सकते हैं  

प्रोफेसर निकोलस डॉफास ने बताया कि ऐसे बुलबुलों का खोल स्टार्स को जन्म देने के लिये एक सही जगह है। प्रोफेसर ने कहा कि इसका कारण ये है कि धूल और गैस इसके अंदर फंसकर तारों में बदल सकते हैं। जैसे ही इस तारे का आकार फैलता है, वैसे ही इसके चारों तरफ से पास होने वाली तारकीय हवायें एक गहरे खोल के साथ बुलबुले बनाती हैं। रिसर्च के मुताबिक तारकीय नर्सरीज़ में सूर्य की तरह के एक से सोलह प्रतिशत तारे बन सकते हैं।

ये विशाल तारा सूर्य के आकार से भी 40 से 50 गुना बड़ा है

अंतरिक्ष की बाहरी कक्षा में धूल और गैस के बादल को तारकीय नर्सरी कहते हैं। जहां दूल और गैस के संपर्क में आने से तारों का जन्म होता है। आमतौर पर ये भी कहा जाता है कि एक सुपरनोवा के पास अरबों सालों पहले हमारा सौरमंडल बना। नए रिसर्च के अनुसार सौरमंडल का जन्म वॉल्फ रायेट स्टार नामक एक बहुत बड़े तारे से शुरु होता है। ये विशाल तारा सूर्य के आकार से भी 40 से 50 गुना बड़ा है।

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