‘कैंसर पीड़ितों में संतान की चाहत की दिशा में एक नई किरण है फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन’

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लखनऊ। कैंसर और इसका इलाज किसी भी मरीज की प्रजनन क्षमता को भविष्य में प्रभावित करने का खतरा पैदा कर सकता है। कैंसर मरीजों की जीवन में संतानोत्पत्ति का सुख और जागरूकता के लिए इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी आईएफएस, स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप एसआईजी संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं, ताकि लोगों को फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के प्रति जागरूक किया जाए और उनकी काउंसलिंग हो सके। दुनिया भर में ये एक नया प्रयास है जो बहुत लोकप्रिय हो रहा है।

इस विषय के बारे में जागरूकता के लिए अपने देश में भी सेमिनारों की श्रंखला का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार 25 फरवरी को होटल क्लार्क अवध में एक भव्य सेमिनार हुआ।

स्थानीय आयोजक और अजंता अस्पताल व आईवीएफ सेंटर की चेयर पर्सन और जानी-मानी आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. गीता खन्ना ने फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की पूरी तकनीक विस्तार से बताई। उन्होंने कैंसर पीड़ित पर इलाज के दौरान प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। डॉ. खन्ना ने बताया कि आज के दौर में देर से विवाह और कॅरियर को प्राथमिकता के चलते अलग सामाजिक परिस्थिति पैदा होती हैं जिसके लिए फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

दिनभर चले इस सेमिनार में आईवीएफ के पुरोधाओं ने अपने अनुभव साझा किए। डॉ. गौरीदेवी आईएफएस की अध्यक्ष और महासचिव डॉ. केडी नायर, डॉ. पंकज तलवार एसआईजी के संयोजक, सह संयोजक डॉ. कुंजूमोइदीन, डॉ. पीएम गोपीनाथ, डॉ.जयेश अमीन ने विषय पर अपने-अपने विचार रखे जिनको देश भर से आए 100 से अधिक गाइनोकॉलिजिस्ट और आईवीएफ विशेषज्ञों ने सुना।

विषय पर गहन जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से इस मौके पर फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक को प्रकाशित करने का लक्ष्य है कैंसर के इलाज में जुटे डॉक्टरों और गाइनाकॉलोजिस्ट के बीच की खाई को पाटना।

अहमदाबाद से आए आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. जयेश अमीन ने बताया कि जवान लड़के और लड़कियों जिनमें भविष्य में कैंसर के इलाज जैसे कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के चलते प्रजनन क्षमता प्रभावित हो जाए उनके लिए फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन एक वरदान साबित होता है। एग बैंकिंग, वीर्य अधिकोष और भ्रूण परीक्षण ऐसे मरीजों के लिए उपलब्ध साधन हैं।

दिल्ली से आए डॉ. केडी नायर ने कैंसर के इलाज में पौरूष पर पड़ने वाले प्रभाव को मौजूद श्रोताओं को गहनता से बताया।

दिल्ली के आरआर हास्पिटल से आए आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. पंकज तलवार ने अपनी परिचर्चा में बताया कि कैंसर से लड़ाई के इलाज के दौरान पीड़ित बच्चे ही नहीं उनके मां-बाप भी किस तरह की असहनीय पीड़ा से गुजरते हैं। उन्होंने चिकित्सा बिरादरी से अनुरोध किया कि ऐसे मरीजों की इलाज से लेकर अभिभावक बनने के सफर के कठिन दौर में उनका साथ दें। डॉक्टरों के पैनल में जानी मानी हस्तियां जैसे डॉ. चन्द्रवती और डॉ. मीरा अग्निहोत्री जैसे दिग्गज कैंसर सर्जन शामिल रहीं।

दशकों पहले ऐसे मरीजों के बारे में संभावनाएं और इलाज सीमित था लेकिन अब आधुनिकीकरण के चलते मेडिसिन और इनफर्टिलिटी क्षेत्र में खासी तरक्की हुई है। चूंकि अब बीमारी से उबरने का दर बढ़ रहा है उसी के साथ बढ़ रही है अपनी संतान पाने की चाहत।

इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला के बाद सभी डॉक्टर होली की मस्ती में सराबोर भी हुए। होली मिलन का थीम रहा…. होली के रंग, आपके संग। इसके साथ चला गुलाल और गुझियों का दौर इस उम्मीद के साथ कि कैंसर के मरीजों को भी माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हो।

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