तो इस वजह से इन्सान बोलता है झूठ

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नई दिल्ली। इंसान का दिमाग कम्प्यूटर की हार्ड ड्राइव की तरह काम करता हैं। दिमाग भी कम्प्यूटर की तरह सारी जानकारियां इकट्ठा करती हैं। तथ्य पहले हिप्पोकैम्पस, दिमाग में एक जगह, में एकत्रित करता है। लेकिन वो वहां इकट्ठा नहीं रहता। जब हम उस बात को याद करते हैं तो वो दोबारा लिखता है।

इस दौरान एक प्रक्रिया होती है। धीरे से तथ्य को सेरेब्रल कोर्टेक्स में पहुंचाया जाता है और उस मुद्दे से अलग किया जाता है जिसके साथ इसे स्टोर किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया को सोर्स इमनेज़िया कहते हैं। इसके कारण लोग किसी बात के सही होने की स्थिति को भूल जाते हैं।

समय के साथ यह गलत याद रखना और बुरी स्थिति में पहुंचता है। इसी वजह से एक गलत याद की गयी बात भी धीरे धीरे सही लगने लगती है। इस दौरान बात का सोर्स भूला दिया जाता है और मैसेज और उसके प्रभाव भारी होने लगते हैं।

हमारा दीमा ग उन्ही बातों को याद रख पाटा है जो हमारे विचारों से मेल खाता है। और हम उन जानकारियों को भूल जाते हैं जो हमसे मेल नहीं खाते। साइकोलॉजिस्टों का मानना है कि लोग हमारी भावनात्मक जगह पर ध्यान देते हैं। ऐसे ही विचार फैलाए जाते हैं। भावनातमक चीजें तथ्यों पर भारी पड़ते हैं।

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