कई राजनैतिक चेहरे हो सकते है सलाखों के पीछे, बीएच लोया की मौत पर SC करेगा नए सिरे से सुनवाई

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नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश बृजगोपाल लोया की अचानक हुई मौत के लगभग तीन साल बाद उनके परिजनों ने चुप्पी तोड़ते हुए उनकी मौत पर सवाल खड़े किए। मालूम हो कि गुजरात के इस चर्चित मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत गुजरात पुलिस के कई आला अधिकारियों के नाम आए थे।सबसे पहले द कारवां पत्रिका में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं। ज्ञात हो कि लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में हुई थी, जिसकी वजह दिल का दौरा पड़ना बताया गया था। वे नागपुर अपनी सहयोगी जज स्वप्ना जोशी की बेटी की शादी में गए हुए थे।

महाराष्ट्र के पत्रकार बंधुराज संभाजी लोने ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। जिस पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। अब इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी है।

इससे पहले भी जज लोया की मौत पर लगातार सवाल उठते रहे है। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है। दरअसल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से अगवा किया गया था। शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया। उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था।

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया। शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश ना होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया। फिर केस की सुनवाई जज बी एच लोया ने की और नवंबर 2014 में नागुपर में उनकी मौत हो गई थी।

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