500 रुपए में आधार का डेटा हुआ था लीक, सरकार ने सुरक्षा के तहत बनाई वर्चुअल आईडी

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नई दिल्ली। मीडिया में पिछले दिनों सिर्फ 500 रुपए देकर आधार डेटा लीक होने की खबरें आई थीं। जिसे मद्देनजर रखते हुए सरकार ने आधार को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार आधार की सुरक्षा के लिए एक वर्चुअल आईडी का निर्माण करने जा रही है। जिसके अन्तर्गत व्यक्ति की पहचान के लिए 12 अंको के आधार नंबर के बजाय इस 16 अंको की वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल होगा।

क्या है ये वर्चुअल आईडी

वर्चुअल आईडी दरअसल कंप्यूटर द्वारा बनाया गया नंबर होगा, जो जरूरत पर तत्काल जारी किया जाएगा। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने दो स्तर का एक सुरक्षा नेट तैयार किया है। जिसके तहत आधार वैरिफिकेशन के लिए हर शख्स की एक वर्चुअल आईडी तत्काल क्रिएट की जाएगी। यूआईडीएआई 1 मार्च, 2018 तक इसके लिए जरूरी सॉफ्टवेयर जारी कर देगा। जबकि 1 जून, 2018 से ‘वर्चुअल आईडी’ की अवधारणा को लागू करने का फैसला किया गया है।

नए सॉफ्टवेयर के काम शुरू करते ही आधार कार्डधारक यूआईडीएआई या आधार एनरोलमेंट सेंटर की वेबसाइट और मोबाइल के आधार एप्लीकेशन पर जाकर वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकेंगे। अब आधार कार्डधारक को किसी सेवा प्रदाता कंपनी को अपने फिंगरप्रिंट के साथ सिर्फ यह वर्चुअल नंबर देना होगा। इस नंबर की अवधि सीमित होगी। अगर आप अपना वर्चुअल आईडी भूल जाते हैं तो उसे दोबारा हासिल किया जा सकता है।

आधार डेटा लीक होने का मामला आया था सामने

एक अंग्रेजी समाचार पत्र के पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में 100 करोड़ आधार नंबर खरीदने का दावा किया। पत्रकार ने बताया था कि उन्होंने एक एजेंट को 500 रुपये दिए। इसके बदले में उसने एक यूजरनेम और पासवर्ड दिया। इस आईडी व पासवर्ड की मदद से वह यूआईडीएआई की वेबसाइट में किसी भी आधार नंबर को डालकर उससे जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त कर सकते थे। इन जानकारियों में नाम, पता, फोटो, फोन नंबर और ईमेल एड्रेस शामिल हैं। साथ ही उन्होंने लिखा कि 300 रुपये और देने पर एजेंट ने एक सॉफ्टवेयर भी दिया। इससे आधार नंबर देकर आधार कार्ड प्रिंट किया जा सकता है।

यूआईडीएआई ने कहा कि उनका सिस्टम है पूरी तरह सिक्योर

मीडिया में आई खबरों को खारिज करते हुए यूआईडीएआई ने कहा कि उनका सिस्टम पूरी तरह सिक्योर है, और इसके मिसयूज को तुरंत पकड़ा जा सकता है। अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा कि बायोमैट्रिक डाटाबेस से डाटा चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया है, यह पूरी तरह सुरक्षित है। सर्च फैसिलिटी पर उपलब्ध जानकारी के बिना बायोमैट्रिक्स का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। यूआईडीएआई ने कहा कि आधार नंबर कोई सीक्रेट नंबर नहीं है, और आधार होल्डर की मर्जी पर किसी सेवा या सरकारी वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेने के लिए इसे अधिकृत एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है।

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