बलूचिस्तान से शुरू होगी पाक के अंत की शुरूआत

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आगरा। पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद की धुरी है। दुनियां भर में घटी तमाम घटनाओं के साथ बलूचियों का दर्द और उन पर हो रहे अत्याचार यह बात साबित कर चुके हैं। पाकिस्तान के गंदे आतंकी चेहरे को बेनकाब करने के उद्देश्य से व मानवाधिकार के नाते पाकिस्तानियों के जुर्म सह रहे बलूचियों की आवाज उठाने व हर सम्भव सहयोग के लिए हिन्द बलूच फोरम का गठन किया गया है।

उन बलूचियों की मदद के लिए जिनसे हमारा सात हजार साल पुराना नाता है। जहां दो शक्तिपीठ हैं और हमारे मराटा भाई-बहन। पाकिस्तान यह अच्छी तरह समझ ले कि हमारी शांतिप्रियता को हमारी कायरता न समझे। पाक के अंत की शुरूआत बलूचिस्तान से होगी।

भारत में पांच लाख बलूची हैं शरणार्थी, फोरम बनने से बढ़ा बलूचियों का हौंसला

28 मार्च 1948 में बलूचिस्तान पर कब्जा करने वाले पाकिस्तान को हिन्द बलूच फोरम के बैनर तले आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। फोरम के पैटर्न जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि हिन्द बलूच फोरम दुनिया का वो बौद्धिक मंच है, जो पाकिस्तान के आतंक से पीड़ित लोगों को एक मंच पर लेकर आएगा और उनकी आवाज को विश्व स्तर तक पहुंचाएंगा।

साथ ही भारत में बतौर शरणार्णी रह रहे 5 लाख बलूचियों के साथ बलूचिस्तान में पाक का आतंक झेल रहे बलूचियों की तस्वीर को स्पष्ट दिकाने की प्रयास किया। फोरम के अध्यक्ष पवन सिन्हा ने कहा कि फोरम के बनने से जिनेवा, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे बलूची भाई बहनों को अपनी आवाज उठाने का साहस मिल रहा है।

 

हमारा यह सोचना बड़ी भूल है कि पाकिस्तान सिर्फ कश्मीर चाहता है। कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान ड्रग्स सप्लाई कर हमारी युवा शक्ति को कमजोर रहा है। हमारे बच्चों के हाथों में मौजूद मोबाइल के माध्यम से भड़काऊ पोस्ट भेज कर हमारे बीच झगड़े करवाता है।

पाकिस्तान का उद्देश्य भारत को दुनिया का सिरमोर बनने से रोकना है। देश के हर नागरिक को सैनिक की तरह सजग रहना होगा। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा कि जिसका जन्म है उसका मरण जरूर होता है। बारत के जन्म कब हुआ कोई नहीं जानता। लेकिन पाकिस्तान की जन्म तिथि हर कोई जानता है। पाकिस्तान ने जो जुल्म बलूचिस्तान के लोगों पर ढहाए है, उससे पाकिस्तान के अंत की शुरूआत बलूचिस्तान से ही होगी। यह निश्चित है। अतिथियों का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन फोरम के प्रदेश संयोजक पुष्कल गुप्ता ने दिया।

आक्रमणकारियों के नाम से सड़के क्यों

राजनैतिक विश्लेषक पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि बारत में बाबर और ओरंगजेव के नाम पर सड़के क्यों? जबकि हमारे ग्रंथों का उर्दू व पारसी में ट्रांसलेसन कराने वाले दारा शिकोह के नाम पर कुछ नहीं। भारत में कश्मीरी पंडितों के जुल्म पर लोग चुप्पी साथ लेते हैं। सुरक्षा मामलों के विश्लेशक आरएसएन सिंह ने कहा कि कश्मीर राजनीतिक समस्या नहीं है। कश्मीर का मात्र 7 फीसदी हिस्सा है जहां समस्या है। यानि सात फीसदी लोग 93 फीसदी हिस्से पर हुकूमत कर रहे हैं। कश्मीर की समस्या को खत्मम करने के लिए हमें लद्दाकियों, गुर्जर मुस्लिम, पहाड़ी मुसलमानों से बात करनी होगी, जो वास्तव में इस्लाम को जानते और समझते हैं।

कांग्रेस ने आजादी नहीं विभाजन दिलाया

आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने उन्होंने कहा कि हमने सुना है कि देशों की सीमा और पड़ोस कभी नहीं बदलता। लेकिन भारत ने इन दोनों को बदलते देखा है। कभी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश सहित कई देश भारत का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश को आजादी नहीं बल्कि विभाजन दिया। बलूचिस्तान, हिन्द प्रांत के लोग पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने भारत से सम्पर्क किया लेकिन जवाहर लाल नेहरू चुप्पी साध गए। बलूचियों ने आज तक अपना कोई प्रतिनिधि पाकिस्तान की संसद में नहीं भेजा है। वह खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते। उपस्थित लोगों को अखंड भारत में मरने की व चीनी वस्तुए प्रयोग न करने की शपथ दिलाई।

खनिज सम्पद्दा के कारण बलूचिस्तान पर कब्जा बनाए रखना चाहता है पाक

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्रानंद व हिन्द बलूच फोरम के अध्यक्ष पवन सिन्हा ने बताया कि बलूचिस्तान की खनिज सम्पदा के कारण पाकिस्तान वहां अपना कब्जा बनाए रखना चाहता है। सोना, तांबा, गैल व तेल की खाने है, जो पाक की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती हैं।

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों ने बारत माता की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्विलत कर किया। मनमोहन ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्य रूप से विजय गोयल, गोविन्द जी, केशव, अश्वनि, ललित प्रजापति, शिवम, बेबीरानी मौर्य, ठाकुर उदयभान सिंह, इंद्रजीत आर्य, अशोक कुलश्रेष्ठ, अंकित जैयवाल, अंकुर सिंह आदि मौजूद थे।

 

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