कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब- क्या सामान्य कैदी के साथ भी संजय दत्त जैसा ही व्यवहार किया जाता है ?

0

मुंबई। बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त अपनी सजा खत्म कर जेल से बाहर जरूर आ गए हैं लेकिन उनकी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में मुंबई उच्च न्यायालय में दावा किया कि अभिनेता संजय दत्त को दी गई पैरोल या फरलो के हर एक मिनट को वह जायज ठहरा सकती है। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या यही नियम सभी कैदियों पर लागू होते हैं। कोर्ट ने सरकार से एक आम कैदी को दी जानी पैरोल और फरलो की विस्तृत जानकारी हलफनामे के तौर दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पत्नी व बेटी की बीमारी के चलते फरलो व पेरोल पर रिहा किए जाते थे संजय दत्त

महाराष्ट्र के महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भाकोनी ने अपने बयान में कहा कि, ‘‘एक मिनट या सेकेंड के लिए भी दत्त का जेल से बाहर जाना कानून का उल्लंघन नहीं था। हम उस हर एक मिनट का लेखा जोखा दे सकते हैं जब उन्हें जेल से बाहर रहने की इजाजत दी गई।”

उन्होंने आगे कहा है कि, ‘‘हर कैदी को पैरोल देने के लिए हम सख्त और मानक प्रक्रिया का पालन करते हैं, आरटीआई और जनहित याचिकाओं के दौर में हम कोई जोखिम नहीं लेते।’’

अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई एक फरवरी के लिये स्थगित करते हुए न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘आप हमें बता सकते हैं कि आपने सभी कैदियों के लिए समान प्रक्रिया का पालन किया, अन्यथा हमें दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।’

पांच महीने से ज्यादा समय तक पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर रहे थे संजय दत्त

बता दें, संजय दत्त को 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में पांच साल की सजा हुई थी लेकिन अच्छे चालचलन को देखते हुए 8 महीने और 16 दिन पहले ही 25 फरवरी 2016 में ही उनकी रिहाई हो गई। संजय दत्त को 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में पांच साल की सजा हुई थी लेकिन अच्छे चालचलन को देखते हुए 8 महीने और 16 दिन पहले ही 25 फरवरी 2016 में ही उनकी रिहाई हो गई। संजय को पत्नी व बेटी की बीमारी के चलते फरलो व पेरोल पर रिहा किया जाता था। गौरतलब है कि, सजा के दौरान अभिनेता पांच महीने से ज्यादा समय तक पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर रहे थे।

loading...
शेयर करें