सरकार बढ़ा सकती है ‘राइट टू एजुकेशन’ का दायरा, अब 12वीं तक मिलेगी मुफ्त में शिक्षा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ‘राइट टू एजुकेशन’ को लेकर एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। सरकार इसका दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। सरकार चाहती है कि राइट टू एजुकेशन का दायरा नर्सरी से 12वीं कक्षा तक लाया जाए। अभी ये पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक ही सीमित है।

‘राइट टू एजुकेशन’ का दायरा बढ़ने से होगा ये फायदा

हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली समेत 12 राज्यों ने प्री स्कूल को प्राइमरी स्कूल में जोड़ने पर सहमति दी है। इन राज्यों का तर्क है कि नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए अभिभावकों को निजी स्कूलों में लाखों रुपये की फीस देकर सीट मिलती है। यदि नर्सरी भी राइट टू एजुकेशन में शामिल होती है तो निजी स्कूलों की बजाय अभिभावकों के पास सरकारी स्कूलों में दाखिले का विकल्प होगा और दाखिले की मनमानी भी रूक जाएगी। क्योंकि इस एक्ट के तहत सरकारी स्कूलों में प्री स्कूल के तहत नर्सरी भी जुड़ जाएंगी।

मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री की अक्ष्यक्षता में होगी बैठक

इस बात का फैसला केंद्र सरकार और राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री की एक कमेटी आपस में विचार करने के बाद लेगी।इस बैठक की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह करेंगे।  इसके अलावा इस बैठक में उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकार की मांग पर आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडब्ल्यूएस कोटे (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित सीटें) को खत्म करने पर भी सहमति बन सकती है। इन राज्यों ने सुझाव दिया कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी ईडल्यूएस कोटे को खत्म किया जाए। क्योंकि इस कोटे के दाखिले पर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन असल में छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बल्कि इस पैसे को सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने पर खर्च किया जाना चाहिए।

 

 

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