मध्य प्रदेश: मिड डे मील के नाम पर कच्ची रोटी, घटिया दाल और पीने के लिए नाले वाला पानी

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भोपाल। जहा एक ओर सरकार सर्व शिक्षा अभियान, सब पढ़े सब बढ़े जैसे नारे लगा रही है। तो वहीँ सरकार स्कूल में पढ़ने वाले बच्चो को पीने के लिए साफ़ पानी तक नहीं उपलब्ध नहीं करा पा रही, सर्व शिक्षा तो कोसो दूर कि बात है।मध्य प्रदेश के छतरपुर में बच्चों को सरकारी स्कूल में मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं के आभाव का एक मामला सामने आया है। छतरपुर स्थित गांव सूरजपुरा में बच्चों को मिड डे मील के नाम पर कच्ची रोटी, नमक और सब्जी के नाम पर रंगीन हल्दी वाला पानी दिया जा रहा है।
ये तो कुछ भी नहीं है, सरकार के लिए सबसे शर्म कि बात ये है की ये बच्चे स्कूल के पास से गुजरने वाले नहर का पानी पीते है।

बच्चो से बात करने पर बच्चो ने बताया कि.. हमे दो— तीन रोटियां ही मिलती है। दाल में कभी स्वाद नहीं आता है। सब्जी में रंग के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता। जब खाना बनाने वाले पुर्सोत्तन अहिरवार से सवाल पुछा गया तो वो इधर-उधर मुह छुपाते नज़र आया, और खाना जल्दी जल्दी बाँट कर भाग गया।

इस मामले के बारे में छतरपुर जिले के डीएम रमेश भंडारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने जांच टीम सूरजपुरा भेज दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन में कोई भी अनियमितता पाए जाने पर सख्त कदम उठाएंगे।

बच्चों की नहर से पानी पीने की बात से इनकार करते हुए डीएम रमेश भंडारी ने कहा कि बच्चे स्कूल में स्थित ट्यूबवेल से ही पानी पीते हैं।
इस पूरे मामले में राज्य की महिला एंव बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि उन्होंने इस मामले के बारे में छतरपुर कलेक्टर से बात की है। उन्होंने इस अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों को हटा देने की बात भी कही। अर्चना चिटनिस ने कहा कि एक जांच टीम का भी गठन किया गया है जो राज्यभर में ऐसे मामलो पर निगरानी रखेगी।

हलाकि इससे पहले भी कई बार समूह के संचालक से शिकायत कि जा चुकी है, पर उससे कोई फर्क नहीं पड़ा। बीआरसी ने भी एक सप्ताह पहले चेतावनी दी थी। इसके बाद भी बच्चो को घटिया खाना परोसा जा राह है।

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