बाघों के संरक्षण पर उठे सवाल, आकड़ों से सामने आई अधिकारियों की लपरवाही

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देहरादून। बाघों के संरक्षण के लिए उत्तराखंड का कॉर्बेट और राजाजी नेशनल पार्क देश में ही नहीं फेमस है। बल्‍कि यह पूरे दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है। अपनी खास इमेज बनाए रखने के कारण यहां पर देश विदेश के सैलानी व शोधकर्ता आते रहते हैं। बाघों के अलावा पार्क में, गुलदार, हाथी, हिरण समेत दूसरे जंगली जानवर भी रहते हैं। साथ ही कुछ ऐसे भी जीव हैं जो प्राय: विलुप्‍त होने के कगार पर है।

लेकिन हालही में हुये सर्वें से जो सच्‍चाई सामने आई वह चौकाने वाली है। सबसे हैरानी की बात यह हैं कि जो रिजल्‍ट मिले हैं। वह बाघों के संरक्षण पर सवाल खड़ा करते हैं।  आकड़ों पर नजर डाले तो पाया गया है कि कई सालों में बाघों के मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी होती रही है। जिसमें वन विभाग की साफ लापरवाही दिखाई दे रही है।

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मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड बाघों के संरक्षण में दूसरा स्‍थान पाया हुआ है। लेकिन इसके बावजूद भी राजाजी और कॉर्बेट पार्क में बाघों की मौत लगातार बढ़ता जा रहा है, जोकि चिंता का विषय बना हुआ है। यदि आंकड़ों की बात की जाए तो बीते 8 साल में अबतक कुल 82 बाघों की मौत हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में मौजूदा समय में बाघों की संख्या वन विभाग के अनुसार 362 है। जो पहले अधिक थे। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक बीते 8 सालों में कुल 82 बाघों की मौत हुई है।

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