कुलभूषण के लिए पाकिस्तान में कोई खालिद, कन्हैया या गुरमेहर नहीं है क्या?

0

नई दिल्ली। भारत में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दोषी पाए गए एक आतंकवादी जिसने करीब 500 लोगों की जान ली थी और करोड़ों की संपत्ति का विनाश किया था। उसके लिए 400 से ज्यादा लोगों ने मर्सी पेटिशन पर साइन किया था और रात को 2:00 बजे अदालत खुलवाई थी। जहां देश विरोधी नारे लगाने वाले जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उसके साथी उमर खालिद के बचाव में कई नेता खड़े हो गए थे। लेकिन पाकिस्तान में कोई कुलभुषण के लिए क्यों नहीं खड़ा होता।

जाघव के ऊपर अभी तक कोई गुनाह भी साबित नहीं हुआ है

दूसरी तरफ यह पाकिस्तान है एक कुलभूषण जाधव की बुजुर्ग मां और पत्नी का पाकिस्तान के लोग किस तरह से हूटिंग कर रहे थे। उनसे कैसे कैसे सवाल पूछे जा रहे थे कि एक कातिल पति से मिलकर तुम्हें कैसा लग रहा है, तुमने अपने कातिल बेटे को देखा तो कैसा फील हुआ। जबकि कुलभूषण जाघव के ऊपर अभी तक कोई गुनाह भी साबित नहीं हुआ है।

आम कैदियों और मछुआरों की सूची की अदला-बदली की है

बता दें कि भारत को पाकिस्तान की हिरासत में मौजूद कुलभूषण जाधव और अन्य भारतीय नागरिकों तक राजनयिक पहुंच का इंतजार है। भारत ने इस्लामाबाद के साथ एक दूसरे की जेलों में बंद आम कैदियों और मछुआरों की सूची की अदला-बदली की है। मंत्रालय ने बताया कि 250 आम कैदियों और 94 मछुआरों की सूची पाकिस्तान को सौंपी गई।

जाधव ने 25 दिसंबर को अपने परिवार से मुलाकात की थी

मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने उसकी हिरासत में मौजूद उन 399 मछुआरों और 58 आम कैदियों की सूची भी साझा की है, जो या तो भारतीय हैं या उनके भारतीय होने की संभावना है। मंत्रालय का कहना है कि 2008 को पाकिस्तान और भारत के बीच राजनयिक पहुंच पर हुए समझौते के प्रावधानों के तहत कैदियों की सूची साझा की गई है। कैदियों की सूचियों की अदला-बदली ऐसे समय की गई है जब मौत की सजा पाए जाधव ने इस्लामाबाद में 25 दिसंबर को अपने परिवार से मुलाकात की थी।

मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि हसनैन नाम का नाबालिग जिसकी नागरिकता का पाकिस्तान ने सत्यापन किया है, उसे आज अटारी, बाघा सीमा होते हुए स्वदेश भेज दिया गया। उसने पिछले साल मई में गलती से सीमा पार कर ली थी। पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों की मौजूदगी में उसे पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा गया।

loading...
शेयर करें