भारत के इस कब्रगाह को चीन बनाना चाहता है स्‍वर्ग, जानिए क्‍यों

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नई दिल्‍ली । झारखंड की राजधानी रांची से कुछ ही दूरी पर एक जिला आता है रामगढ़। जहां पर 667 चीनी सैनिकों का कब्रिस्‍तान मौजूद हैं। इसकी देखभाल भारत  तमाम उतार-चढ़ाव रिश्‍तों के बाद भी करता आ रहा है। वो भी उतने ही आदर के साथ जितना भारतीयों के शहीद वीर सपूतों के साथ करता है।

वहीं मीडिया में आई खबर के मुताबिक चीन के वाणिज्य दूतावास के दूत एमए झानवू ने कहा है कि चीन चाहता है कि रामगढ़ में स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान को वैश्विक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही आगे कहा है कि इस स्‍थान को ऐसा बनाना चाहता है, जो किसी भी सुंदर और आकर्षक स्‍थानों से कम नहीं होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था, उस समय लाखों की तादात में चीनी सैनिक संयुक्त बलों में भाग लिया था। उनमें से कुछ अचानक काल के गाल में समा गए थे। जिन्‍हें इसी रामगढ़ शहर में दफन किया गया था। साथ ही यह भी जान ले कि इस युद्ध के दौरान कई अन्‍य देशों के सैनिक भी हिमालय में दफन हैं। जिनकी खोज समय समय पर विदेशी संस्‍था करती आ रही है।

वहीं इस मामले पर आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कोलकाता में चीनी वाणिज्य दूतावास का पांच सदस्यीय दल एमए झांगवू की अगुवाई में पिछले शुक्रवार को कब्रिस्तान गया था, और उन्होंने शहीद चीनी सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। तभी उन्‍होंने ने प्रशासनिक अधिकारियों से ये बात कही थी।

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