ये है देश का हाल – चपरासी बनने आए एमबीए, बीटेक, पीएचडी जैसी डिग्री वाले लोग

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ग्वालियर। देश में मोदी सरकार का गठन होने से पहले उन्होंने देश के युवाओं से बेरोजगारी दूर करने का वादा किया था। लेकिन सरकार को 4 साल पूरे होने को आए लेकिन वो वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। देश के बेरोजगारों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। देश के नौजवान बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर चपरासी बनने की लाइन में खड़े हैं। ग्वालियर जिला कोर्ट में निकली चपरासी की वैकेन्सी के लिए एमबीए, बीटेक और तो और पीएचडी डिग्री धारकों ने भी आवेदन किया है। इस आवेदन के शुल्क के रुप में सरकारी खाते में 1.2 करोड़ रुपए आ चुके हैं।

अब या तो देश का एजुकेशन सिस्टम खराब है। जो इन्हें इस काबिल भी नहीं बना पाता कि इतनी बड़ी डिग्री लेने के बाद भी ये अपने लिए एक सम्मानजनक नौकरी नहीं ढूंढ़ पाते हैं। या फिर देश का प्रशासन खराब है जिसे देश के टैलन्ट की कद्र ही नहीं है। जिस कारण ये चपरासी बनने को मजबूर हैं। मामला गंभीर है देश के युवा को उसकी योग्यता के अनुसार रोजगार ना मिलने पर उसका भरोसा देश के प्रति कायम नहीं रह पाता है। देश चला रहे लोगों को इस बारे में आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

जानिए क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला कोर्ट में चपरासी के केवल 57 पदों को लिए सरकार को 60 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इन आवेदनों में एमबीए, बीटेक व पीएचडी डिग्री होल्डर शामिल हैं। जबकि इस पद के लिए सरकार की तरफ से योग्यता केवल 8वीं पास रखी गई है। इतनी बडी संख्या में आवेदन आने से प्रशासन अब इस दुविधा में है कि वो ये प्रक्रिया संपन्न कैसे कराए। और शहर में आने वाली बेरोजगारों की भीड़ को नियंत्रित कैसे करे। ये प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए जिला कोर्ट ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।

वेतन भी नहीं है कुछ खास

चपरासी पद पर भर्ती होने वाले युवकों को कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से वेतन मिलेगा। यह अकुशल श्रेणी के कर्मचारी हैं, जिसके चलते चयनित उम्मीदवार को 7 हजार 500 रुपए का वेतन मिलेगा।

चयन प्रक्रिया निपटाने के लिए 14 जजों की कमेटी गठित

इतनी बड़ी चयन प्रक्रिया से निपटने के लिए जिला कोर्ट ने 14 जजों की कमेटी गठित की है। 28 जनवरी से उम्मीदवार की स्क्रीनिंग (अनुवीक्षण) होगी। इस दौरान उम्मीदवार को मूल दस्तावेज और अपने फोटो के साथ जज के सामने उपस्थित होना होगा। स्क्रीनिंग की मेरिट के बाद सेकेंड राउंड में साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। स्क्रीनिंग और साक्षात्कार में मिले अंकों को जोड़कर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इसी के आधार पर ज्वाइनिंग कराई जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया 18 फरवरी तक चलेगी।

– 14 जजों का इंटरव्यू बोर्ड होगा।

– 2857 आवेदकों की स्क्रीनिंग प्रत्येक जज को औसतन करनी होगी।

– 204 औसत आवेदक हर दिन एक जज के सामने से गुजरेगा।

– 1.2 करोड़ रुपये सिर्फ आवेदन फीस के रूप में ही कोर्ट को मिले हैं।

– चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले 80 फीसद उम्मीदवार 12 वीं, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री धारक हैं।

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