इस मुद्दे पर एक साथ आए दो राजनीतिक दुश्मन, बीजेपी को मिला कांग्रेस का साथ

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नई दिल्ली। अभी तक केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष की भूमिका निभा रहे कांग्रेस हर मुद्दे पर एक दूसरे का विरोध करते ही नजर आते हैं लेकिन इस बार एक ऐसा मुद्दा छिड़ गया है जिसपर एक-दूसरे के धुर विरोधी ये दोनों दल साथ में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह मुद्दा कोई और नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर पेश की गई वह रिपोर्ट है जिसको झूठा बताते हुए भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया है।

दरअसल, यूएन रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में लोगों के साथ मानवाधिकार का हनन हो रहा है, जिसके तुरंत समाधान की जरूरत है। इसमें कहा गया है कि कश्मीर में राजनीतिक स्थिति के किसी भी समाधान में हिंसा का चक्र रोकने के संबंध में प्रतिबद्धता और पूर्व में तथा मौजूदा मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर जवाबदेही होनी चाहिए। इस रिपोर्ट में यूएन ने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्‍मीर (पीओके) का भी जिक्र किया है। यूएन का कहना है कि वहां भी मानवाधिकार का हनन किया जा रहा है। इसके अलावा रिपोर्ट में विवादित तौर पर भारत से कहा गया है कि कश्‍मीर की लोगों की इच्‍छा का सम्‍मान किया जाए।

विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि ने यूएन की इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए झूठा करार दिया है। भारत का कहना है कि यूएन की ये रिपोर्ट गलत मंशा से प्रेरित है। विदेश मंत्रालय के बयान के बाद अब इस रिपोर्ट के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस दोनों एक साथ खड़ी हो गई हैं।

भाजपा की ओर से जहां भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस रिपोर्ट के खिलाफ आवाज बुलंद की है। वहीं इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी भाजपा का जमकर साथ दिया है। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने भी यूएन की इस रिपोर्ट की खिलाफत की है।

इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि इस रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंक दो। सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि मैं उस रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंक देता। उन्होंने इस रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताया है। स्वामी ने कहा कि इस रिपोर्ट को ऐसे लोगों ने तैयार किया है जिन्हें इस मुद्दे की जानकारी ही नहीं। उन्होंने कहा कि हम इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करना नहीं चाहते।

वहीं यूएन द्वारा कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह मसला 1994 के रिजॉल्यूशन के साथ समाप्त होता है, जिसे सभी राजनीतिक दलों द्वारा समर्थन दिया गया था। यदि भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर के संबंध में कोई बकाया मुद्दा है, तो केवल यही है कि हमें पीओके को कैसे हासिल करना है।

इसके अलावा कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि इस रिपोर्ट के खिलाफ हम सरकार के साथ है। सरकार इस रिपोर्ट के खिलाफ एक्शन लें हम उसके समर्थन में है।

 

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