एन्जॉय करना चाहते हैं सर्दियों की छुट्टियां, तो जरुर जाएं अल्मोड़ा

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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा उत्तराखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। बताते चलें, अल्मोड़ा पर प्रकृति काफी मेहरबान है। ऐसे में अगर भी प्रकृति का जबरदस्त नजारा देखना चाहते हैं तो एक बार अल्मोड़ा जरुर जाइए। वैसे भी जल्द ही सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में अगर आप सर्दियों के मौसम में किसी हिल स्टेशन का आनंद लेना चाहते हैं तो अल्मोड़ा आपके बेस्ट प्लेस है।

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कमाऊं क्षेत्र में विशेष महत्व रखने वाले अल्मोड़ा की गिनती देश के प्रमुख क्षेत्रों में होती है। ऐसे में यहां पूरे साल देश और विदेश भर से लाखों की तादाद में पर्यटक घूमने आते हैं। इसलिए आज हम आपको अल्मोड़ा के कुछ फेमस जगहों के बारे में बताने वाले हैं, जहां आप अपनी छुट्टियां अच्छे से एन्जॉय कर सकते हैं।

कैंची

कैंची भुवाली से सात किमी की दूरी पर भुवालीगाड के बाईं ओर स्थित है। नीम करौली बाबा को यह स्थान बहुत प्रिय था। प्राय: हर गर्मियों में वे यहीं आकर निवास करते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियां भी हैं। अब तो यहां पर नीम करौली बाबा की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित कर दी गयी है। यहां पर टूरिस्टों के ठहरने के लिए एक सुन्दर धर्मशाला भी है।

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कैंची मन्दिर में प्रतिवर्ष 15 जून को वार्षिक समारोह मानाया जाता है। उस दिन यहां बाबा के भक्तों की विशाल भीड़ लगी रहती है। नवरात्रों में यहां विशेष पूजन होता है। नीम करौली बाबा सिद्ध पुरुष थे। उनकी सिद्धियों के विषय में अनेक कथाएँ प्रसिद्ध हैं। कहते हैं कि बाबा पर हनुमान की विशेष कृपा थी। हनुमान के कारण ही उनकी ख्याति प्राप्त हुई थी। वे जहां जाते थे वहीं हनुमान मन्दिर बनवाते थे। यूपी की राजधानी लखनऊ का हनुमान मन्दिर भी उन्होंने ही बनवाया था। ऐसा कहा जाता है कि बाबा को ‘हनुमान सिद्ध’ था।

गरम पानी

कैंची से आगे ‘गरमपानी’ नामक एक छोटा सा नगर आता है। यह स्थान हल्द्वानी, काठगोदाम और अल्मोड़ा के बीच का ऐसा स्थान है जहां पर यात्री चाय पीने और भोजन करने के लिए आवश्यक रूप से रुकते हैं। गरमपानी का पहाड़ी भोजन प्रसिद्ध है। यहां का रायता और आलू के हल्दी से रंग गुटके दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

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हरी सब्जियों की यह मण्डी है। यहां से दूर-दूर तक पहाड़ी सब्जियाँ भेजी जाती हैं। पहाड़ी खीरे, मूली और अदरक आदि के लिए भी गरमपानी विख्यात है। यहां से आगे बढ़ने पर खैरना आता है। खैरना में भुवालीगाड, कोसी में मिल जाती है। यहीं कोसी पर एक झूला पुल है। खैरना मछिलयों के शिकार के लिए विख्यात है। थोड़ा और आगे बढ़ने पर दो रास्ते हो जाते हैं। एक मार्ग रानीखेत को और दूसरा मार्ग अल्मोड़ा को चला जाता है।

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अल्मोड़ा के मार्ग में खैरना से आगे काकड़ी घाट नामक स्थान पड़ता है। काकड़ी घाट का प्राचीन महत्व है। यहां पर एक पुराना शिव मन्दिर है। जब पर्वतीय अंचल में मोटर मार्ग नहीं थे तो बद्रीनाथ जाने के लिए यहीं से पैदल मार्ग कर्णप्रयाग के लिए जाता था।

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आज भी कई धार्मिक यात्री इसी मार्ग से पैदल चलकर बद्रीनाथ-केदारनाथ की यात्रा करने जाते हैं। काकड़ी घाट के नजदीक ही एक पुल कोसी पर बना है। उस पुल को पार करते ही मोटर-मार्ग पहाड़ी की चोटी की ओर बढ़ने लगता है। यह पर्वतीय मार्ग-ऐतिहासिक नगरी अल्मोड़ा में आता है।

अल्मोड़ा के किले

अल्मोड़ा नगर के पूर्वी छोर पर ‘खगमरा’ नामक किला है। कत्यूरी राजाओं ने इस नवीं शताब्दी में बनवाया था। दूसरा किला अल्मोड़ा नगर के मध्य में है। इस किले का नाम ‘मल्लाताल’ है। इसे कल्याणचन्द ने साल 1563 में बनवाया था। कहते हैं, उन्होंने इस नगर का नाम आलमनगर रखा था। वहीं चम्पावत से अपनी राजधानी बदलकर यहां लाये थे।

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आजकल इस किले में अल्मोड़ा जिले के मुख्यालय के कार्यलय हैं। तीसरा किला अल्मोड़ा छावनी में है, इस लालमण्डी किला कहा जाता है। अंग्रेजों ने जब गोरखाओं को पराजित किया था तो इसी किले पर साल 1816 में अपना झण्डा फहराया था।

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अपनी खुशी प्रकट करने हेतु उन्होंने इस किले का नाम तत्कालीन गवर्नर जनरल के नाम पर – ‘फोर्ट मायरा’ रखा था। परन्तु यह किला ‘लालमण्डी किला’ के नाम से अदिक जाना जाता है। इस किले में अल्मोड़ा के अनेक स्थलों के भव्य दर्शन होते हैं।

नन्दा देवी मन्दिर

गढ़वाल कुमाऊं की एक मात्र ईष्ट देवी भगवती नन्दा पार्वती है। नन्दा अष्टमी के दिन सम्पूर्मम पर्वतीय अंचल में नन्दा की विशेष पूजा होती है। नन्दा देवी की मूर्ती केले के पत्तों और केले के तनों से बनाई जाती है। नन्दा की सवारी भी निकाली जाती है। नन्दा अष्टमी भाद्रपद अर्थात् सितंबर के महीने में आती है।

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यहां पर इस दिन बहुत बड़ा मेला लगता है। इस दिन दर्शनार्थी आकर पूजा करते हैं। मेले में झोड़ा, चाँचरी और छपेली आदि नृत्यों का भी सुन्दर आयोजन होता है। कुमाऊं के कई अंचलों की लोकनृत्य की पार्टियां यहां आकर अपना-अपना कौशल दिखाती हैं, पर्यटक, पदारोही, सैलानी और साहित्य एवं कला प्रेमी इन्ही दिनों अधिकतर कुमाऊँ की संस्कृति तता वहां के जन-जीवन की वास्तविक जानकारी करने हेतु अल्मोड़ा पहुंचते हैं।

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अल्मोड़ा की नन्दा देवी के दर्शन करना अत्यन्त लाभकारी माना जाता है। अल्मोड़ा में नन्दा देवी के अलावा त्रिपुर सुन्दरी मन्दिर, रघुनाथ मन्दिर, महावीर मन्दिर, मुरली मनोहर मन्दिर, भैरवनाथ मन्दिर, बद्रीनाथ मन्दिर, रत्नेश्वर मन्दिर और उलका देवी मन्दिर प्रसिद्ध हैं। जामा मस्जिद, मैथोडिस्ट चर्च और अंगलीकन चचें प्रसिद्ध है।

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