जल उठा महाराष्ट्र – पुणे में जातीय हिंसा में एक की मौत, मुंबई समेत 13 शहरों में धारा 144 लागू

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पुणे। कहने को तो हम 21 वीं सदी में पहुंच गये हैं लेकिन देश की रगो से जातिवाद का जहर निकलने का नाम ही नहीं ले रहा है। सदियों पुरानी परंपराओं के नाम पर पूरे शहर में आग लगा देना ना जाने किस परंपरा की देन है। करीब 200 साल पहले जब अंग्रेजों ने भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में करीब 450 महार यानि की दलित सैनिकों की मदद से पेशवा(मराठाओं) की भारी-भरकम सेना को परास्त कर दिया था। उसी दिन के उपलक्ष्य में पुणे में हर साल दलित जाति के लोग जश्न मनाते हैं। लेकिन इस साल ये जश्न मातम में तब्दील हो गया। भीमा-कोरेगांव की 200 साल पुरानी जंग की बरसी के मौके पर भीमा, पबल और शिकरापुर गांव में दलितों और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई।

इस कार्यक्रम के दौरान दो गुटों में आपसी संघर्ष हो गया

पुणे से करीब 30 किलोमीटर दूर पुणे-अहमदनगर हाइवे में पेरने फाटा के पास चल रहे इस कार्यक्रम के दौरान दो गुटों में आपसी संघर्ष हो गया। संघर्ष के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई घायल हो गये। देखते ही देखते लोगों ने हाइवे पर करीब 100 गाडियों में तोडफोड़, पथराव व आगजनी कर माहौल में दहशत कायम कर दी। हिंसा का तांडव पूरे महाराष्ट्र समेत आस-पास के राज्यों में भी फैल गया। बसों में तोड़फोड़ हुई और कई जगह दलित समुदाय के लोगों ने हिंसक प्रदर्शन भी किये।

महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने दिया बयान

महारष्ट्र के सीएम का कहना है कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई पर हुए इस कार्यक्रम में करीब 3 लाख लोगों ने शिरकत की थी, जिसे देखते हुए हमने पुलिस की 6 कंपनियां भी तैनात की थी। कुछ शरारतीतत्वों द्वारा माहौल खराब करने के उद्देश्य से हिंसा फैलायी गयी। इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके साथ-साथ उन्होंने मृतक के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने का भी ऐलान किया।

जबकि कांग्रेस की तरफ से मुंबई कांग्रेस के डॉ. राजू वाघमारे ने इस हिंसा के लिये आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आरएसएस के कुछ लोग लंबे समय से दलितों पर हमला करने के लिये भीमा-कोरेगांव की लड़ाई पर होने वाले इस कार्यक्रम की प्रतीक्षा कर रहे थे। वहीं इस हिंसा पर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने भी अपना बयान दिया है उन्होंने कहा कि ये हिंसा दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा फैलाई गई है, इसके साथ ही उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।

हिंसा और प्रदर्शनों की वजह से आम जनता को हुई भारी परेशानी

पुणे में हुई हिंसा को लेकर मुंबई के कई इलाको में दलित संगठन आरपीआई से जुड़े हुए लोगों ने रास्ता रोको प्रदर्शन किये। इन प्रदर्शनों की वजह से मुंबई में कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे ऑफिस जाने वाले लोगों व स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने इस हिंसक प्रदर्शन के स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। क्योंकि अगर सही समय पर पुलिस एक्शन ले लेती तो ये घटना इतना बड़ा रुप ना ले पाती।

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