भारत को ही क्यों माना गया कामसूत्र की जन्मभूमि, जानिए..

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मुंबई। भारत को कामसूत्र की भूमि भी माना जाता है जिसके कई कारण भी मिले है। बता दे की कामसूत्र की किताब को तीसरी सदी में लिखा गया था। जिससे भारत में काम वासना को लेकर एक अलग ही सोच देखने को मिलती है हालांकि कामसूत्र का मतलब सेक्स नहीं आनंद लेना होता है। यानी कोई चीज़ जो आनंद पाने के लिए की जाए।

इतिहासकारों के अनुसार कामसूत्र की किताब के दूसरे अध्याय में संभोग की बात की गई है। और सम्भोग की कुछ पोजीशन को विस्तार से समझाया गया है लेकिन एक बात जो गौर करने वाली है, ये किताब स्त्री और पुरुष दोनों के विचारों का सम्मान करती है और सेक्स के लिए महिला की सहमति जरूरी मानती है।

इसके अलावा भारत के कई प्राचीन मंदिर के दीवारों पर उकेरी गई देवी देवताओं की कला कृति यहां आने वाले पर्यटकों को उत्तेजित करती है। कई मूर्तियों में अप्सराओं को श्रींगार करते हुए, मटके से पानी ले जाते हुए दिखाया है तो कई मूर्तियों में पुरुष महिला के कामुक मुद्राओं को दिखाया गया है, जो ये साबित करती है की उस वक़्त समाज की सोच कितनी परिपक्व थी।

जिन चीजों पर समाज का कोई भी वर्ग खुलकर बात करना तक नहीं पसंद करता उसी देश में कई ऐसे अवशेष है जो इसे कामसूत्र की जन्भूमि की तरफ इशारा करते हैं। भारत में एक के बाद एक कई धर्मों का आगमन हुआ और यही कारण है की बहुत से विशेषज्ञ भारत में कामुकता के पतन का कारण मुगलों को मानते हैं। क्योकि मुगलों में महिलाओं पर खुले विचारों पर काफी बंदिशे थी। लेकिन बदलते दौर के साथ कई लोगों ने अपनी संस्कृति में सही और गलत चीजों की व्याख्या शुरू कर दी जिसमे संभोग को गलत माना गया।

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