योगी सरकार का फरमान, यूपी में अब नहीं सुनाई देगी मस्जिद के बाहर अज़ान

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लखनऊ। भारत विभिन्न धर्मों को मानने वालों का देश है। यहां पर हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सभी अपने-अपने धर्मों को मानते हैं और अपने-अपने तरीकों से उन धर्मों का पालन करते हैं। यहां पर मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च के बाहर अक्सर लाउडस्पीकर लगे हुए देखे जा सकते हैं। इन लाउडस्पीकरों पर अब कोर्ट की नजर पड़ गई है। धार्मिक स्थलों पर बिना अनुमति के लगे हुए लाउड़स्पीकरों को हटाने का कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया है। जिसके तहत योगी सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर दिया है।

वरिष्ठ वकील मोतीलाल यादव ने दायर की थी याचिका

इस मामले पर कोर्ट का ध्यान खीचने के लिए वरिष्ठ वकील मोतीलाल यादव ने एक याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में उन्होंने कोर्ट से दरख्वास्त की थी कि मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च व अन्य धार्मिक स्थलों पर लगे हुए लाउड़स्पीकर हटाए जाए। उनके अनुसार कोर्ट ऐसा करने का निर्देश सरकार को दे सकती है।

दायर याचिका को संज्ञान में लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा कि अफसर बहरे बैठे हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव गृह, सिविल सेक्रेटेरियट और यूपी प्रदूषण कण्ट्रोल बोर्ड के चेयरमैन को अलग-अलग व्यक्तिगत हलफनामा देकर छह हफ्ते में बताना होगा कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए उन्होंने क्या किया? जवाब दाखिल न करने की स्थिति में अफसरों को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर 1 फ़रवरी 2018 को पेश होना होगा।

कोर्ट के आदेश पर एक्शन में आयी योगी सरकार

योगी सरकार ने सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी धार्मिक स्थलों पर बिना इजाजत लगाए गए स्पीकर हटाए जाएंगे। लाउड़स्पीकर बजाने के लिए सभी धार्मिक स्थलों को 15 जनवरी तक अनुमति लेनी होगी। इसके बाद भी अगर कहीं बिना अनुमति के लगे हुए लाउडस्पीकरों पाये गये तो उन्हें 20 जनवरी तक हटाया जाएगा।

बैंड-बाजे के साथ निकलने वाली बारातें भी आएंगी कानून के दायरे में

कोर्ट ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा है कि उन धार्मिक यात्राओं और जुलूसों पर क्या कार्रवाई की गई? जो दिन-रात कभी भी शोर-शराबे के साथ निकाले जाते हैं। इनमें बारात भी शामिल है। कोर्ट का अगला सवाल सरकार के लिए है कि सरकार इस बात का जवाब दे कि अब तक कितने ऐसे लाउड़स्पीकरों को धर्मस्थलों से हटाया गया है जिनके पास लिखित अनुमति नहीं है। इसके अलावा जिन अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बज रहे है उन अधिकारियों पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया।

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