सीएम योगी-त्रिवेंद्र की मुलाकात पर खडे़ हुए सवाल, क्‍या सुलझा पायेंगे परिसंपत्‍ति का विवाद

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देहरादून। उत्‍तर प्रदेश से 2000 में अलग होने के बाद उत्‍तराखंड एक अलग राज्‍य बना। कई दिनों के आंदोलन के बाद भारत गणराज्‍य का एक राज्‍य बना था। दूसरा हिस्‍सा बनने के बाद दोनों राज्‍यों के बीच कुछ परिसंपत्तियों  का बटवारा नहीं सुलझा है। लेकिन दोनों राज्‍यों और केंद्र में भाजपा की सरकारे बनने के बाद यह मसला सुलझने की दिशा में दिख रहा है। इससे पहले भी कई मुख्‍यमंत्रियों ने इस पर वार्तालाप किया लेकिन रिजल्‍ट शुन्‍य ही रहा। लेकिन जब भाजपा के सीएम त्रिवेंद्र रावत यूपी के सीएम योगी से गोरखपुर मिले तो सकारात्‍मक फल दिखाई दिये।

बता दें कि बटवारे के समय से ही यह विवाद चला आ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार दस से अधिक विभाग ऐसे हैं, जिनमें परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर अभीतक दोनों राज्‍यों में एक राय नहीं हो पायी है। इसलिए आज भी अधर में लटकी हुई है। जिन विभागों के लेकर दोनों राज्‍यों में सहमति अभी तक नहीं बन पाई है इस प्रकार से हैं। जिनमें सबसे ऊपर सिचाई विभाग है।

सिंचाई विभाग – उत्तर प्रदेश को अभीतक अपने कब्जे में रहे 266 आवास, दो गेस्ट हाउस, 36 सिंचाई की नहरों, 214 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड सिंचाई विभाग को हस्तांतरित करना बाकी है।

पंचायती राज- उत्तर प्रदेश रिवाल्विंग फंड में उत्तराखंड के 13 जिलों की जिला पंचायतों की जमा धनराशि पर वसूला गया ब्याज अभी तक नहीं दिया गया है। इसी के साथ दोनों राज्‍यों में औद्योगिक विकास विभाग,  उत्तराखंड बहुद्देशीय वित्त विकास निगम, परिवहन निगम है। जिनको लेकर दोनों राज्‍य आमने सामने बने रहते हैं।

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