मोदी सरकार सीमाओं पर लगवाएगी अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर

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नई दिल्‍ली। देश में घुसपैठियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार अब देश की सीमा पर अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर लगाने जा रही है। जिससे कोई भी घुसपैठिया देश में घुस नहीं पाएगा।

अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर

अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर रोकेगी घुसपैठ

मोदी सरकार इजराइल की तर्ज पर सीमा पर ‘ऑपरेशन चक्रव्यहू’ के जरिए चौकसी का फैसला किया है। इसके तहत हिंदुस्तान की सीमा पर अंडर वाटर और अंडर ग्राउंड सेंसर लगाने की तैयारी हो रही है। यानी आतंकी अब न तो जमीन और न ही पानी के जरिए घुसपैठ कर पाएंगे।

बीस करोड़ की लागत से लगेगा अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर

अभी तक जो जानकारी मिली उसके मुताबिक, जुलाई से ही पाकिस्तान से लगी जम्मू-कश्मीर और गुजरात की सीमा में सेंसर लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। पहले फेज में जम्मू-कश्मीर में दो जगहों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया जा रहा है। इसके तहत पांच-पांच किलोमीटर की दूरी पर दो जगह सेंसर लगेंगे। बीएसएफ इसके लिए शुरुआती दौर में 18 से 20 करोड़ की लागत के सेंसर लगाएगी।

राजनाथ सिंह

गृह मंत्री करेंगे बैठक

गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस मसले पर शुक्रवार शाम छह बजे जम्मू-कश्मीर की सीमा और उसकी सुरक्षा को लेकर बैठक करेंगे। इसमें सभी पैरामिलिट्री फोर्स, राज्य की पुलिस और BSF अधि‍कारियों से बातचीत होगी. मीटिंग में बॉर्डर मैनेजमेंट सेक्रेटरी भी शि‍र‍कत करेंगे।

अलग-अलग कंपनियों से खरीदने की योजना

सरकार अलग-अलग कंपनियों से सुरक्षा के ये उपकरण खरीद रही है। इसके तहत अंडर ग्राउंड सेंसर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर, माइक्रो एयरो स्टैट (बैलून) खरीदने की योजना है।

सीमा पर कैसे होगी निगरानी

बताया जाता है कि पकिस्तान से लगी भारतीय सीमा पर सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को एकसाथ जोड़कर उसके लिए कंट्रोल रूम बनेगा। इस कंट्रोल में 24 घंटे और सातों दिन छह से सात लोग तैनात रहेंगे।

कैसे काम करेगा रडार और सेंसर

सरहद पर लगा रडार अपने चारों ओर यानी 360 डिग्री के इलाके में किसी घुसपैठिए के आने पर सीधे कंट्रोल रूम को जानकारी देगा। सिग्नल मिलते सीमा पर लगे कैमरे ऑटोमैटिक घुसपैठि‍ए की तरफ घूम जाएंगे। यही नहीं, वहीं लगा ऑटोमैटिक गन आतंकी को पलक झपकते ढेर कर देगा।

तुरंत जानकारी देंगे अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर

अंडर ग्राउंड और अंडर वाटर सेंसर में कमरे भी लगे होंगे, जो किसी भी संदिग्ध के आने पर उसको स्कैन करके कंट्रोल रूम को जानकारी देंगे। पानी के अंदर लगा सेंसर वैसे ही काम करेगा जैसे जमीन के ऊपर लगा सेंसर काम करेगा. कंट्रोल रूम में सिग्नल मिलते ही इस ओर एक्शन लिया जाएगा।

कैसे काम करता है इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर

इसमें दिन और रात में काम करने वाले कैमरे सीमा पर लगे रहेंगे। इनका सीधा संपर्क कंट्रोल रूम से होगा। जैसे ही सीमा पर कोई गतिविधी दिखी, ये सीधे कंट्रोल रूम सिग्नल देंगे। इसके अलावा माइक्रो एयरो स्टैट ऐसे बैलून होंगे, जो सीमा पर निगरानी करने के लिए लगाए जाएंगे। इनमें हाई क्वालिटी वाले कैमरे लगे होंगे। ये कैमरे भी कंट्रोल रूम से जुड़कर पूरी स्थिति की जानकारी देंगे। यानी अगर ऊपर आसमान से कुछ दूरी तक अगर कोई गतिविधि होगी तो उसको पकड़ लिया जाएगा।

इजरायल दौरे पर राजनाथ ने लिया था निर्णय

गृह मंत्रालय ने सीमा पर सुरक्षा के लिए BSF की मांग पर गुजरात और जम्मू कश्मीर सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगाने के काम को स्वीकृति दे दी है। 30-30 किलोमीटर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गुजरात और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर लगाएगा। जिसमें करीब 60 करोड़ का खर्च आएगा।

राजनाथ सिंह ने इजरायल दौरे पर लिया था जायजा

जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल गए थे, तब उन्होंने वहां की सीमा पर इलेट्रॉनिक सर्विलांस का जायजा लिया था। उसी समय यह निर्णय हुआ था कि इजराइल की तर्ज पर भारत-पाकिस्तान सीमा पर अंडर वाटर और अंडर अर्थ सेंसर लगाकर सुरक्षा की जाएगी।

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