खरीदारी के लिए शुभ है अक्षय तृतीया

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लखनऊ। अक्षय तृतीया इस बार नौ मई को है। अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय न हो। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि को युगाआदि तिथियों में गणना होती है।

AkshayaTritiya

अक्षय तृतीया का है बड़ा महत्‍व

ऐसी मान्यता है कि इस तिथि को सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था। देवरिया जनपद के कोहरा गांव के निवासी ज्योतिषाचार्य डॉ अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि अक्षय तृतीया को ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान बद्रीनाथ के कपाट खोले जाते हैं। इस तिथि को अगर कृतिका या रोहिणी नक्षत्र हो और दिन बुधवार या सोमवार हो तो यह तिथि सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

इस बार की तृतीया है खास

कोई भी शुभ कार्य करने के लिए यह तिथि पवित्र मानी जाने वाली अक्षय तृतीया को श्रद्धालु उपवास, दान, पुन्य आदि कर्मफल को करते हैं। नौ मई दिन सोमवार को मृश्र नक्षत्र और सुकर्मा योग में अक्षय तृतीया पड़ रहा है। अक्षय तृतीया से शादियों की शुरुआत होती है। इससे बैसाख मास के शुक्ल तृतीया को किसी पंचांग शुद्ध की जरूरत नहीं होती। बिना देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। इस बार नहीं बन रहे कई योग इस बार भौतिक सुख के स्वामी दैत्य गुरु शुक्राचार्य अस्त हो गए हैं।

शुक्र के अस्‍त होने से नहीं हो पाएगी शादी

शुक्र के अस्त होने के कारण इस बार विवाह का योग नहीं बन रहा है। शुक्र ग्रह के अस्त होने पर यह कार्य नहीं कर सकते। कुंआ खोदना, वाती, उपवन, गृह आरम्भ, शिलान्यास, गृह प्रवेश, एकादशी, प्रदोष, शिवरात्रि आदि वृतों का आरंभ या उनका उद्यापन, वधु प्रवेश, होडस महादान, अष्टिका महादान, गोदान, वेद, वृत, समय पर न हुए बालकों के जातक कर्म, नामकरण संस्कार, देव स्थापना, मंत्र दीक्षा, मुंडन, उपनयन संस्कार, विवाह, देव की दर्शन यात्र, सन्यास ग्रहण, राज्य दर्शन ये सभी कार्य नहीं किए जाते हैं। खासकर इस बार शादी विवाह के लिए योग नहीं है।

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