फिल्म रिव्यू : सब कुछ होते हुए भी समझ के बाहर है ‘अजहर’

0

फिल्म का नाम : अजहर

स्टार कास्ट : इमरान हाशमी, नरगिस फाखरी और प्राची देसाई

डायरेक्टर : टोनी डी सूजा

स्टार : 2.5

पूर्व क्रिकेटर मो. अजहरुद्दीन और इमरान हाशमी के फैंस का इंतजार आज खत्म हुआ। सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल क्रिकेटर रह चुके अजहरुद्दीन की जिंदगी पर आधारित फिल्म अजहर आज बॉकस ऑफिस पर रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म में लीड रोल इमरान हाशमी ने निभाया है। टोनी डी सूजा को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं आइए फिल्म की समीक्षा करते हैं।

अजहर का फिल्म रिव्यू

अजहर

कहानी

90 के दशक के भारतीय टीम के उम्दा बल्लेबाज और कैप्टन रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन (इमरान हाशमी) की पूरी कहानी सिल्वर स्क्रीन पर बड़े ही मनोरंजक तरीके से पेश की गई है। कहानी शुरू होती है अजहर पर लगे मैच फिक्सिंग के आरोप से। इस पर क्रिकेट एसोसिएशन समेत कई अन्य लोग भी अजहर के खिलाफ हो जाते हैं और आखिर तक सामने आने और उसका साथ देने के लिए कतराते रहते हैं।

फिर अजहर अपने केस को लडऩे के लिए अपने वकील दोस्त रेड्डी (कुणाल रॉय कपूर) से निवेदन करता है कि वह उसका केस लड़े। फिर कहानी फ्लैशबैक में जाती है और पता चलता है कि हैदराबाद का होनहार लड़का अपने नाना के दिल को रखने के लिए मुंबई में क्रिकेट टीम में शामिल होने के लिए आता है। मुंबई आते ही उसके नाना का स्वर्गवास हो जाता है, जिसकी वजह से वह अपनी परफॉर्मेंस में कमजोर होता सा दिखता है।

इसके बाद उसे अपने नाना की बात याद आती है और वह इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल हो जाता है। यहां पर उसका सबसे करीबी दोस्त रवि शास्त्री (गौतम गुलाटी) होता है। वहीं, दूसरी ओर अजहर के अपोजिट केस लडऩे वाली नामचीन वकील मीरा (लारा दत्ता) होती है, जो केस को जीतने के लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहती है। साथ ही मीरा चाहती है कि इस केस में अजहर की दोनों बीवियां नौरीन (प्राची देसाई) और संगीता (नरगिस फाखरी) उसके सपोर्ट में सामने आएं, लेकिन अजहर ऐसा नहीं चाहता है।

धीरे-धीरे कहानी आगे बढ़ती है और अजहर का वकील केस हारने की कगार पर आ जाता है। इसी के साथ फिल्म में दिलचस्प मोड़ आता है और तरह-तरह ट्विस्ट के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

डायरेक्शन

फिल्म का डायरेक्शन ठीक-ठाक है, मैच वाले सीन बहुत अच्छे लगते हैं। राकेश सिंह की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है। लोकेशन्स अट्रैक्ट करती हैं। टोनी डीसूजा ने इस बायोपिक फिल्म के निर्देशन में वाकई में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। लेकिन कहीं न कहीं वे कुछ और बेहतर कर सकते थे।

एक्टिंग

इमरान हाशमी ने की एक्टिंग काबिले तारीफ है। उन्होंने खुद को अजहरुद्दीन के रोल में बखूबी ढाला है। फिल्म में पहली वाइफ का किरदार प्राची देसाई ने सही तरीके से निभाया है, वहीं संगीता के किरदार में नरगिस ने ठीक-ठाक काम किया है। गौतम गुलाटी और लारा दत्ता का काम भी अच्छा है।

म्यूजिक 

फिल्म का म्यूकिक जबरदस्त है। ‘बोल दो ना जरा’, ‘इतनी सी बात है’ और क्लासिक सांग ‘ ओए-ओए’ भी सुनने में अच्छे लगते हैं।

देखें या नहीं 

अगर आप एक अच्छी बायोपिक फिल्म मिस नहीं करना चाहते हैं और इमराम हाशमी के फैन हैं तो ये फिल्म देख सकते हैं।

loading...
शेयर करें