इस सावन में जरुर करें रंग बदलने वाले अद्भुत शिवलिंग के दर्शन, मिलेगा दोगुना पुण्य

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।संदीप शर्मा

आगरा। सावन के पहले सोमवार की शुरुआत ऐतिहासिक रंग बदलने वाले राजेश्वर मन्दिर पर हर हर महादेव और बोल बम जैसे जयकारो से शुरू हुई। आगरा के हर मन्दिर में सुबह तड़के से ही भक्तो का तांता लगा हुआ है। आगरा में सावन के चारो सोमवार चारो कोनो पर स्थित शिवमन्दिरो में बारी बारी विशाल मेले का आयोजन होता है जिसकी शुरुआत राजपुर चुंगी स्थित राजेश्वर मन्दिर से होती है। यू तो चारो मन्दिरो का अपना इतिहास है पर मानते हैं की  श्रीराजेवश्वर महादेव मंदिर में स्थित अदभुत शिवलिंग की आराधना की जाए, तो पुण्य दोगुना मिलता है। यह अद्भुत शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलती है, जिसे देख भक्त भगवान के चमत्कार की अनुभूति करते है।

अद्भुत शिवलिंग

अद्भुत शिवलिंग का रंग सफेद, नीला और गुलाबी

इस अवसर पर श्रीराजेवश्वर महादेव मंदिर मेला कमेटी के उपाध्यक्ष राजबहादुर उपाध्याय ने बताया कि राजेश्वर महादेव मंदिर स्थित शिवलिंग का  जब सुबह तड़के दर्शन किया जाए तो ये दूधिया सफेद होती है और दोपहर में इस शिवलिंग के दर्शन किए जाएं तो इस दूधिया शिवलिंग पर नीले रंग की धारियां आ जाती हैं। वहीं शाम की आरती के समय जब भक्त् पूजन के लिए आते हैं, तो भक्तों को गुलाबी रंग के शिवलिंग के दर्शन होते हैं।

महंत पप्पू ने बताया कि पूर्वजों के अुनसार मंदिर में शिवलिंग की स्थापना राजाखेडा के एक साहूकार ने करवाई थी। बताया जाता है, कि साहूकार नर्मदा नदी से शिवलिंग लेकर आ रहे थे। गांव से पहले उन्होंने रात्रि विश्राम के लिए एक जगह बेलगाड़ी रोक दी। रात्रि में सपने में भगवान ने कहा कि कि शिवलिंग को इसी स्थान पर स्थापित कर दो पर साहूकार यह नही चाहता था इसलिए उसने सुबह बेलगाड़ी में रखने के लिए शिवलिंग को जमीन से उठाकर ले जाने का प्रयास किया गया, तो बैलगाड़ी आगे ही नहीं बड़ी। कई गाड़ी और दर्जनों लोगों के प्रयास के बाद भी गाड़ी का पहिया आगे नहीं बढा इसी कशमकश के दौरान शिवलिंग जमीन पर गिर गई और वहीँ स्थापित हो गयी । इसके बाद पांच गांव के लोगों ने मिलकर मंदिर का निर्माण कराया, जिसमें गांव उखर्रा, राजपुर, बाग राजपुर, चमरौली और कहरई सम्मलित हैं। मंदिर की सेवा के लिए 24 बीघा जमीन भी जमीदारों द्वारा दी गई थी।

आज सुबह 4 बजे से ही ऐतिहासिक मन्दिर के बाहर हजारो लोगो की लाइन लगी हुई थी।पुलिस प्रशासन रात से ही व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है।मेले में हर तरह के सामान की स्टाल और झूले लगे है जिनका लोग आराधना के बाद आनन्द उठा रहे हैं पर सबसे ज्यादा बिक्री फूल और बेलपत्र की ही हो रही है।

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