…अन्यथा सोनम वाकई बेवफा हो जाएगी

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दिनेश पाठक।

जब से मैंने सुना कि कौशाम्बी की सोनम गुप्ता की शादी बेवफाई के आरोप में रद्द हो गई, जो उस बेचारी ने की ही नहीं. बहुत गुस्सा हूँ मैं. आखिर उसका दोष क्या है ? कोई मुझे बताएगा ? नहीं न, आखिर किस मुंह से बताएगा कोई ? दही जो जम गई है मुंह में. अरे नासपीटों, सोनम को बेवफा बनाया किसने ? बताओगे कोई ? चित भी मेरी और पट भी, इसी अंदाज में जीना चाहते हो न तुम ? कुछ ऐसे ही आड़े-बेड़े, किन्तु सही सवालों के साथ वह मेरे सामने थी.

सोनम

मैं भी भौचक हो उसकी बातें सुन रहा था. किसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करता तब तक वह नया सवाल परोस देती. मैं चुपचाप सुनता रहा. बचपन में ही मेरा बाप मर गया. माँ जैसे-तैसे तीन बेटियों को पालने का यत्न करती. मुश्किल से दस साल की थी, जब माँ मुझे अपने साथ काम पर ले गई. बर्तन धुलते, झाड़ू-बुहारू करते कई साल गुजर गए.
मेरे शरीर में बदलाव आने लगे. जिस घर में काम करती थी, उस घर का एक छोरा आगे-पीछे घूमता. टाफियां देता. कभी-कभी रुपया भी. समझ नहीं थी, तो उसके एहसान तले दबती गई. भैया बुलाने लगी थी मैं उसे. यह सब चलता रहा, एक दिन मैंने माँ को सब बताया तो मेरा जाना बंद हो गया उस घर में. मिन्नतों के बाद माँ ने फिर भेजा उसी घर में, लेकिन आंटी को पूरी बात बताकर.

अब मेरे सामने और मुश्किल आ गई. भैया से तो आंटी ने बचा लिया लेकिन मैं अंकल की नज़रों में चढ़ गई. वो तो और बड़े वाले निकले. आंटी के साथ मुझे भी बाजार ले जाने लगे. फिर यदा-कदा अकेले भी गाड़ी में बाजार ले जाते और इधर-उधर घुमाते. मेरे लिए, मेरी माँ के लिए कपड़े खरीदते. गाड़ी में चलते हुए कोई न कोई बहाना करके मुझे यहाँ-वहां छूते. मुझे भी अच्छा लगने लगा. माँ को मैंने बताया तो वह नाराज हुई और काम पर जाने से मना कर दिया. लेकिन मुझे काम तो करना ही था. यही नियति थी मेरी. नहीं उन अंकल के यहाँ, किसी और के यहाँ. एक साल में मैंने आधा दर्जन ठिकाने बदले. हर जगह बुरी नजरों से बचने की जद्दोजहद रहती. मैं खूबसूरत थी, इसमें मेरा तो कोई दोष नहीं था.
मैंने तय किया अब इनसे मैं अपने तरीके से निपटूंगी. सभी अंकल, भैया लोगों से पैसे ऐंठना, गाड़ियों में घूमना मैंने अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया. मंहगे फोन, ब्रांडेड कपड़े अब मेरे पास भी थे लेकिन किसी कलमुंहे को अपने करीब फटकने नहीं दिया. एक दिन एक अंकल ने जोर-जबरदस्ती करने का प्रयास किया तो सडक पर ही गाड़ी रोकवा के मैंने शुरू कर दिया हंगामा.

अब अंकल को काटो तो खून नहीं. इज्जतदार आदमी थे. खूबसूरत बीवी, बहुएं, दो बेटियां, मायने भरा-पूरा परिवार था. जैसे-तैसे मामला निपटाकर अंकल बढ़े और मुझे धमकी दी कि सोनम, तुम्हें बदनाम कर दूंगा. तुम बेवफा निकली. इतना पैसा मैंने तुम पर लुटाया लेकिन तुमने तो एक……भी साथ नहीं दिया. यह सारी बातें मैंने टेप कर ली और ले जाकर आंटी को सुना दिया. पुराने फोन काल की रिकार्डिंग भी सुना दी. घर में उनकी बड़ी छीछालेदर हुई. बेटे, बहुओं, बेटियों के सामने मुंह दिखाने लायक नहीं रहे. लेकिन भाई कोई मुझे बताएगा कि मुझे बेवफा किसने बनाया ?

मैं बेवफा तब नहीं होती, जब ललचाई नज़रों से मुझे घूरने वालों के साथ मैं बिस्तर में होती. मैं बेवफा तब नहीं होती, जब भाई टाइप लोगों की बाइक पर चिपक कर बैठती और वे हमें इधर-उधर नदी किनारे, पार्कों में घुमाते. छूने की कोशिश करते और मैं मुस्कुराते हुए उन्हें कहती, और छुओ, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. मैं बेवफा तब भी नहीं होती जब मेरी माँ को मिल रही धमकियों के आगे मैं झुक जाती और उन कलमुंहों की शिकार हो जाती. मैं बेवफा तब भी नहीं होती, जब मेरी माँ खुद ही ले जाकर मुझे उन्हें परोस देती.

यह कहानी एक बेवफा सोनम की नहीं, लाखों-करोड़ों सोनम की है और सोनम को बेवफा किसी एक ने नहीं घोषित किया. किसी एक ने शुरू भर किया. उसके बाद तो सोनम को बेवफा करने वालों की भीड़ लग गई. बाप रे बाप, इतना कैसे गिर सकता है पुरुष समाज ? लेकिन यह सवाल मैं पूछ ही क्यों रही ? वह तो गिरा ही हुआ है तभी तो सोनम को पूरी दुनिया में एक साथ बेवफा करार दिया गया.
अगर यह किसी एक की करतूत होती तो सोशल मीडिया में हैशटैग और ट्रेंडिंग नहीं होती. खोजो अपने बीच के लोगों को. लिखो, बताओ कि उनकी माँ, बहन, बेटियां भी सोनम हो सकती हैं. कोई भी लड़की यूँ ही बेवफा नहीं होती. तुम्हारी कारस्तानियों की वजह से ही बेवफाई होती है. करनी पड़ती है. अपनी इज्जत के लिए अगर किसी की हत्या करना बेवफाई है तो मैं बेवफा हूँ. अन्याय से लड़ते हुए अगर किसी को जल भेजवाना बेवफाई है, तो मैंने की है और आगे भी करती रहूंगी. अपनी आन-बान-शान में जो भी अंकल, भैया रास्ते में आएंगे, मैं उनके साथ ऐसे ही बर्ताव करती रहूंगी. न दबूंगी, न झुकूंगी.

सोनम को मैं जानता तक नहीं था. मैंने सोचा फिर यह क्यों आई मेरे पास. मैं कोई आइएएस, मंत्री नहीं. मामूली पत्रकार हूँ. अब मैंने सवाल दागा-तुम यह सब मुझे क्यों बता रही हो, सुना रही हो. बोली-मेरी एक-एक बात लिखकर उसी तरह वायरल करो, जैसे इस धरा पर मौजूद तुम्हारी बिरादरी ने मुझे बदनाम करने के लिए किया. जिससे किसी और सोनम की शादी न टूटने पाए. यह भी लिख देना, बिना बेवफाई किये शादी तोड़ने वालों से, कि बिना जांचे-परखे वे भी ऐसी हरकतें न करें, अन्यथा सोनम वाकई बेवफा हो जाएगी.

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