आतंकवाद के खिलाफ अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत ने ताजिकिस्तान से मिलाया हाथ

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारत और ताजिकिस्तान अफगानिस्तान में उसकी शांति प्रक्रिया में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हम लोग अपने परस्पर दोस्त और पड़ोसी अफगानिस्तान को उसकी जनता के लक्ष्यों और आकांक्षाओं से पूरी तरह से वाकिफ कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसा अफगान वासियों के नेतृत्व और अफगानिस्तान की अपनी शांति प्रक्रिया के जरिए होगा। उन्होंने यह टिप्पणी शनिवार को राष्ट्रपति भवन में अपने ताजिकिस्तानी समकक्ष एमोमली रहमान के सम्मान में आयोजित भोज में की। 

अफगानिस्तान

अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत ने ताजिकिस्तान से मिलाया हाथ

रहमान का भारत दौरा भारत-ताजिकिस्तान कूटनीतिक रिश्ते की 25वीं वर्षगांठ के ठीक पहले हुआ है।  इस भोज के अवसर पर मुखर्जी ने कहा कि रहमान का दौरा दोनों देशों की दोस्ती के स्थायी होने की गवाही है।  दोनों देशों की इच्छा है कि चिंता के विभिन्न मुद्दे के समाधान के लिए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया जाए।

दुनिया खासकर हम लोगों का क्षेत्र आज आतंकवाद के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। भारत और ताजिकिस्तान दोनों इसके किसी भी रूप और विस्तार का विरोध करते हैं। हमलोगों के लिए हमारे देशों का विकास और उनकी प्रगति सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। 

मुखर्जी ने कहा कि भारत ताजिकिस्तान की शांति और स्थायित्व में राष्ट्रपति रहमान की भूमिका को समझता है जिसका इस क्षेत्र में वैसा ही हितकारी प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट और उसके शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता के दावे के समर्थन के लिए ताजिकिस्तान का आभारी है। 

पूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद ताजिकिस्तान के बनने को पहले मान्यता देने वाले देशों में भारत शामिल है। रहमान कोच्चि का दौरा करने के बाद शुक्रवार को यहां पहुंचे। वह 14 दिसंबर से भारत के पांच दिवसीय दौरे पर आए हैं। 

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