बेचारा अब्दुल सत्तार मदद मांगने के अपराध में गया जेल

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सोशल मीडिया को आज के दौर में सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है और यह है भी लेकिन यही माध्यम यदि किसी की जान जोखिम में डाल दे तब आप क्या कहेंगे। ऐसा ही कुछ हुआ है भारत से सऊदी अरब गये कामगार अब्दुल सत्तार के साथ। मदद की उम्मीद से फेस बुक पर दुख बांटने के चलते उसकी जान खतरे में है। आइये जाने क्या है अब्दुल सत्तार की कहानी

अब्दुल सत्तार

सऊदिया में ट्रक ड्राइवर का काम कर रहा है अब्दुल सत्तार

अपनी रोजी रोटी की तलाश में दो साल पहले अब्दुल सत्ता मकंद रसऊदी अरब पहुंचे थे। 35 वर्षीय सत्तार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के डांडेली के रहने वाले हैं। चार बच्चों के पिता सत्तार 2014 से ही सऊदी अरब की एक कंस्ट्रकशन इंजीनियरिंग फर्म अल खोबार में बतौर ट्रक ड्राइवर काम कर रहे हैं।

सत्तार के साथ मुश्किल ये है कि उनकी कंपनी ने पिछले लगभग दो सालों से उन्हें न ही छुट्टी दी है और न ही उन्हें भारत वापस लौटने की इजाजत है। उनका इकामा (वर्क परमिट) कंपनी ने अपने कब्जे में ले रखा है।

सत्तार का कहना है कि कंपनी ने उनसे जबरन डॉक्यूमेंट्स पर साइन करवा लिए हैं। अपनी इसी कहानी को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया था। उम्मीद थी कि इससे उन्हें शायद वतन वापसी में मदद मिले। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह हिम्मत तोड़ने वाला था।

सोशल मीडिया से मदद मांगना बना मुसीबत

सत्तार ने अपना दर्द दिल्ली के एक सोशल ऐक्टिविस्ट कुंदन श्रीवास्त्व को बताया। 12 मार्च को अब्दुल सत्तार ने अपनी दुखभरी कहानी का वीडियो कुंदन को भेजा। कुंदन ने यह सोचकर ये वीडियो फेसबुक पर पोस्ट कर दिया कि ये कहानी जानकर भारत सरकार अब्दुल की मदद करेगी।

रोते हुए ट्रक ड्राइवर अब्दुल का ये वीडियो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया और इसने दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। वीडियो में रोते हुए सत्तार ने बताया कि ‘कंपनी न तो उन्हें सैलरी देती है और न ही खाने के पैसे।’

ये वीडियो वायरल हो तो गया लेकिन इसके परिणाम सत्तार की उम्मीदों के उलट हुए। एक भारतीय कामगार के शोषण के आरोपों से बौखलाई सऊदी अरब की कंपनी ने पहले तो वीडियो अपलोड करने वाले कुंदन को इसे तुरंत हटाने और माफी मांगने की चेतावनी दी और अगले ही दिन सऊदी पुलिस ने अब्दुल सत्तार को ‘झूठी जानकारी फैलाने’ के आरोपों में जेल में डाल दिया।

कुंदन ने इस वीडियो को इस उम्मीद के साथ अपने फेसबुक पेज से डिलीट कर दिया और माफी मांग ली कि इससे सऊदी सरकार अब्दुल को रिहा कर देगी। लेकिन ये सिर्फ एक छलावा साबित हुआ। सत्तार को रिहा तो किया गया लेकिन अगले ही दिन उसे पुलिस ने फिर से गिरफ्तार कर लिया। इस बार सत्तार को कहां ले जाया गया इसका कुछ पता नहीं है।

सत्तार का फोन नंबर और ईमेल पर संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है। सत्तार की मां उसे लगातार फोन कर रही हैं लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सत्तार से आखिरी बार उनकी बात पांच दिन पहले हुई थी और उसके दोस्तों ने बताया कि वह जेल में है।

कुंदन ने सत्तार की मदद के लिए भारत सरकार से अपील की है लेकिन उनका कहना है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अपील किए जाने के बाद उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कुंदन का कहना है कि सत्तार ने उनसे कहा था कि उसकी जिंदगी खतरे में है।

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