पाक मीडिया का हमला

पाक मीडिया में इन दिनों भारत के खिलाफ काउन्टर हमलों की मुहिम छिड़ी हुई है। मोहम्मद जामिल एक स्वतंत्र पत्रकार ने भी पाकिस्तान के बचाव के संदर्भ में पठानकोट हमले का विश्लेषण अपने ढंग से किया है।बहुत सतही ढंग से वह कहते हैं कि जिस तरह भारत में किसी भी आतंकवादी कार्रवाई के बाद पाक पर आरोप लगते हैं ठीक उसी तरह से पाक मीडिया और विश्लेषकों का एक धड़ा पाकिस्तान में किसी भी आतंकी कार्रवाई के बाद भारत की रॉ का नाम घसीटता है।

पाकवास्तव में भारत और पाकिस्तान के कट्टरपंथी और उग्रवादी संगठन यह नहीं चाहते कि दोनो देश अपने विवादों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अख्तियार करें। इसीलिए वह माहौल तनावपूर्ण बनाये रखने के लिए इस तरह की कार्रवाइय़ा करते हैं।

वह कहते हैं कि भारत सरकार पठानकोट हमले के संदर्भ में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की किसी चूक से इनकार कर रही है। लेकिन सुरक्षा तंत्र और खुफिया विभाग की विफलता पर बहस जारी है। सवाल है कि शस्त्र घुसपैठ की पहली सूचना देने वाले पंजाब पुलिस के अधिकारी के आतंकवादियों द्वारा अपहरण नजरअंदाज किया गया। सीमा सुरक्षा बल के जवान क्या कर रहे थे। सर्विलांस उपकरण और नाइटविजन उपकरण कहां थे। एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) कपिल काक का कहना है कि आपको (सरकार) 24 घंटे पहले जानकारी मिल गयी थी कि पंजाब में कुछ होने जा रहा है फिर भी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता क्यों नहीं बरती गयी। वह रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह से इत्तेफाक नहीं रखते कि हमले में पाक सेना और खुफिया एजेंसी शामिल थी।

पाक मीडिया का छिद्रान्वेषण

लेखक का कहना है कि भारतीय मीडिया बिना किसी ठोस सबूत के पठानकोट हमले के लिए पाकिस्तान पर लगातार आरोप लगा रहा है। हालांकि मीडिया, वेबसाइट्स, वर्डप्रेस, डॉट काम आदि में खोजी पत्रकारों ने इस कहानी में कई छेद तलाशे हैं और कई वैलिड सवाल उठाये हैं। इस बीच भारत ने दो टेलीफोन नम्बर और एक आतंकवादी द्वारा पाकिस्तान में बने जूते पहने जाने के सबूत दिये हैं। लेखक के अनुसार भारत ने न तो आतंकवादियों की पहचान करायी न ही डीएनए टेस्ट। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत से ठोस सबूत और सूचनाएं देने को कहा है।

लेखक ने अपने लम्बे लेख में भारतीय एजेंसी रॉ पर भी आरोप जड़े हैं लेकिन आश्चर्य है कि इतने संवेदनशील मसले पर भी भारत का मीडिया कोई खोजी पत्रकारिता नहीं कर रहा। सिर्फ जितना बताया गया उतना ही लिख रहा है। क्या जवाब देना सिर्फ सरकार का काम है।

 

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