अभिमन्यु अब नहीं मरेगा…

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“अभिमन्यु”

अभिमन्यु अब नहीं मरेगा
चाहे जितना द्वार रोक दो
चाहे जितने वीर छोड़ दो
अभिमन्यु अब जान गया है
अभिमन्यु अब नही मरेगा !!
देखो कितने युग बदले हैं
लोग भाव संस्कृति बदले !
किंतु आज भी पात्र वही हैं
भीष्म वही और कर्ण वही हैं !
सारे द्वार पर सगे-सम्बंधी
किंतु कमी है कृष्ण तुम्हारी!
अस्त्र शस्त्र से लैस खड़े हैं
दुश्शासन क्या चीर हरेगा ?
अबकी बार नही मरेगा !
अभिमन्यु अब नही मरेगा !!
आपद धर्म वो धर्म कहाँ है?
शकुनी देखो छुपा कहाँ है?
संजय अब तो द्वार द्वार है
त्रेता द्वापर का युग्म यहाँ !
लोकतन्त्र के भाव अड़े हैं
युधिष्ठिर तो साथ खड़े हैं
अभिमन्यु के साथ सत्य है!
अभिमन्यु अब नही अकेला !
अभिमन्यु अब नहीं मरेगा !!
ख़ुश होते हो तुम क्यो इतना
अभिमन्यु ने तोड़ दिया हैं
समस्त द्वार देखे -अनदेखे !
अभिमन्यु अब नहीं अकेला
अभिमन्यु ने सीख लिया है !!
अभिमन्यु अब नही मरेगा
अभिमन्यु अब नहीं मरेगा !!

-हबीबुल हसन

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