जानें क्या है अमरनाथ यात्रा और इसका पौराणिक महत्व

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लखनऊ। अमरनाथ यात्रियों पर गोली बरसा कर आतंकियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका कोई दीन और ईमान नहीं होता। उन्हें बस एक चीज पता होती है वो है सिर्फ नफरत फैलाना, मासूम लोगों का खून बहाना। सावन के पहले सोमवार को यात्रियों की बस पर हमला कर आतंकियों ने 7 लोगों की हत्या कर दी। इस आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर है। अब सभी इन आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहें हैं। आज हम आपको अमरनाथ यात्रा के हर पहलू से अवगत करायेंगें। इसके इतिहास से रूबरू कराएंगे।

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा का हिंदू धर्म में महत्व, हजार गुना फल देने वाला होता है

अमरनाथ यात्रा दरअसल हिंदुओं के लिए पवित्र अमरनाथ गुफा तक की यात्रा है।प्राचीनकाल में इसे ‘अमरेश्वर’कहा जाता था। हिमालय की गोद में बसा अमरनाथ गुफा श्रीनगर से करीब 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस यात्रा का जितना पौराणिक महत्व है, उतना ही ऐतिहासिक महत्व भी है। पुराणों के अनुसार, काशी में शिवलिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना फल देने वाला होता है ये अमरनाथ यात्रा।

कैसे जाएं.. 

आपको बता दें कि ये अमरनाथ गुफा समुद्र तल से 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा 160 फुट लंबी,100 फुट चौड़ी और काफी ऊंची है। इसकी यात्रा के लिए दक्षिण कश्मीर के पहलगाम से ये दूरी क़रीब 46 किलोमीटर पैदल पूरा जाना होता है। इस यात्रा को करने में पांच दिन का वक़्त लगता है।

वहीं एक दूसरा रास्ता सोनमर्ग के बालटाल से भी है, जिससे अमरनाथ गुफा की दूरी महज 16 किलोमीटर है। लेकिन मुश्किल चढ़ाई होने के ये रास्ता बेहद कठिन माना जाता है। सावन से इस यात्रा की शुरुआत होती है जो करीब 45 दिन चलती है। इतिहास के लेखों से पता चलता है कि  14वीं शताब्दी के मध्य से लगभग 300 वर्ष की अवधि के लिए अमरनाथ यात्रा बाधित रही।

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अमरनाथ यात्रा का महत्व

1420-70 ईस्वी में कश्मीर के शासकों में से एक ‘जैनुलबुद्दीन’ ने अमरनाथ यात्रा की थी। हिंदू धर्म में इस यात्रा का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं कि यहां बर्फ से शिवजी का निर्माण होता है बल्कि ये इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि इसी गुफा में भगवान शिव ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात श्री अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं।

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शास्त्रों की माने तो एक बार अमरनाथ की यात्रा करने से इन्सान का जीवन सफल हो जाता है। उसे सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। शिव जी ने अमरत्व का रहस्य बताने के लिए ऐसा स्थान ढूँढा था जहाँ इसे कोई न सुन पाए लेकिन माता पार्वती को बताते समय इस रहस्य को शुक (तोता) और दो कबूतरों ने भी सुन लिया था।

यह शुक बाद में शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए, जबकि गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा उड़ता नजर आजाता है जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है।

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पौराणिक मान्यताएं 

मान्यताओं के अनुसार सावन के पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के दिन भगवान शिव खुद यहां पधारते हैं। मान्यता ये भी है कि गुफा में बने शिवलिंग के दर्शन मात्र से 23 पवित्र तीर्थों के पुण्य के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।

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