अम्बेडकर के बहाने मोदी की निगाह दलितों पर

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अम्बेडकर को समर्पित पीएम मोदी के दौरे पर रामकृष्ण वाजपेयी का नजरिया

नरेन्द्र मोदी का उत्तर प्रदेश दौरा सकुशल निपट गया। और भाजपा को मिशन 2017 की कुंजी भी मिल गयी। यूपी के इस दौरे में मोदी अम्बेडकर के बहाने दलित वोट बैंक को साध गये। यह बात तय है कि भाजपा का मिशन 2017 दलितों के साथ आए बगैर कामयाब नहीं हो सकता है। और मोदी ने यही किया जिस अम्बेडकर महासभा लखनऊ के प्रांगण में दलितों की रहनुमाई का दम भरने वाली सुश्री मायावती मुख्यमंत्री रहते हुए भी नहीं गयीं। वहां मोदी गये। संविधान निर्माता के अस्थि कलश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माल्यार्पण किया। यह था मोदी का खामोश वार। चिंगारी वह सुलगा गये हैं यही उनके विरोधियों को उनके खिलाफ मुखर होने का मौका देगी। यही मोदी की राजनीति भी है।

अम्बेडकर

भाजपा के लोग भी मानते हैं कि अंबेडकर महासभा में प्रधानमंत्री की संभावित खामोशी को भी भाजपा विरोधी मुद्दा अवश्य बनाएंगे। हैदराबाद में दलित छात्र द्वारा आत्महत्या के मामले को लेकर भाजपा व केंद्र सरकार विरोधियों के निशाने पर है। सवाल उठ रहे हैं और आगे भी उठेंगे। सरकारी नौकरियों में दलितों को पदोन्नति में आरक्षण के लाभ से संबंधित विधेयक भी संसद में लंबित है। बहुत संभव है जल्दी ही इस पर भी सार्थक परिणाम सामने आएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वाराणसी के बाद दोपहर को जब लखनऊ में अम्बेडकर यूनिवर्सिटी पहुंचे तो छात्रों ने रोहित वेमुला की खुदकुशी को लेकर पीएम का विरोध किया। इसके लिए वह तैयार थे। प्रधानमंत्री की सभा में छात्रों ने हंगामा किया और ‘मोदी गो बैक’ के नारे लगाए, मोदी ने इसका जवाब दिया भावुकता से।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में हैदराबाद में सुसाइड करने वाले रोहित वेमुला का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र को सुसाइड करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ देर मौन फिर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब ये खबर मिलती है कि मेरे देश के एक नौजवान बेटे रोहित को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ता है…. (थोड़ी देर की खामोशी) उसके परिवार पर क्या बीती होगी। मां भारती ने अपना एक लाल खोया। कारण अपनी जगह पर होंगे। राजनीति अपनी जगह पर होगी, लेकिन सच्चाई ये है कि मां भारती ने अपना एक लाल खोया।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि वह रोहित के मौत की पीड़ा महसूस करते हैं।

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कहा जा रहा है कि पीएम मोदी ने यूपी के गर्वनर राम नाइक के सुझाव पर अम्बेडकर महासभा के दफ्तर जाने का फैसला किया। नाइक पिछले साल दिसंबर में महासभा के दफ्तर गए थे। अम्बेडकर की पत्‍नी सविता ने 1991 में यहां उनका अस्‍थ‍ि कलश रखा था। पीएम यहां ऐसे वक्‍त में आए, जब अम्बेडकर के जन्‍म की 125वीं जयंती मनाई जा रही है। पीएम की यह यात्रा यूपी विधानसभा चुनाव को रोहित की आत्महत्या की छाया से बचाने का प्रयास कहा जा सकता है। क्योंकि बिहार पराजय के बाद भाजपा और आरएसएस, दोनों ही किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते।

अम्बेडकर महासभा किसकी सलाह पर गये मोदी

पीएम के लखनऊ दौरे से पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने शहर के बाहरी इलाके में अम्बेडकर के नाम पर स्‍मारक बनने के लिए 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है। महासभा के अध्‍यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल ने बीते हफ्ते अखिलेश से मुलाकात की, जिसके बाद सीएम ने यह प्रस्‍ताव दिया। निर्मल का दावा है कि सीएम ने स्‍मारक बनवाने के लिए जमीन देने की पेशकश की, लेकिन यह साफ नहीं किया कि प्रोजेक्‍ट के लिए पैसा कौन देगा? वहीं, पीएम के अम्बेडकर महासभा के दफ्तर जाने की योजना पर बीजेपी प्रवक्‍ता चंद्रमोहन ने कहा कि पीएम दलितों, उपेक्ष‍ितों और पिछड़े लोगों के उत्‍थान के लिए कटिबद्ध हैं। बहुत संभव है कि प्रधानमंत्री दिल्ली पहुंचने के बाद इस प्रोजेक्ट का खर्च केन्द्र द्वारा उठाये जाने की घोषणा कर दें। इस तरह अखिलेश के प्रयास की एक झटके में हवा भी निकाल सकते हैं।

 

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