अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के फरार कर्मचारियों पर एसआईटी का शिकंजा

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आगरा। डॉ बीआर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के फरार कर्मचारियों पर एसआईटी ने शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। एसआईटी न्यायालय से फरार कर्मचारियों के खिलाफ कुर्की वारंट लेने जा रही है। इसके साथ ही जिन 84 कॉलेजों से जाली मार्कशीट जारी की गई थी, उनको भी जांच के घेरे में ले लिया है।

डॉ बीआर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी

डॉ बीआर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी पर शक गहराया

डॉ बीआर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के बीएड सत्र 2004 से 2009 सत्र के दौरान करीब 25 जारी जाली मार्कशीट जारी की गई थी। इस फर्जीवाड़े का खुलासा उस वक्त हुआ जब, 2012 में अलीगढ़ के एक छात्र ने सरकारी नौकरी में अपनी मार्कशीट लगाई थी और वह मार्कशीट वेरीफिकेशन के लिए यूनिवर्सिटी आई थी। तब उस मार्कशीट का फर्जी करार दिया गया था। इस पर छात्र ने हाईकोर्ट में रिट डाल कर पूरे प्रकरण की जांच कराए जाने की मांग की थी। तब तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर डीएन जौहर ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर सत्र 2004 से 2009 सत्र तक बीएड की सभी मार्कशीट की जांच कराए जाने की मांग की थी। उस समय यह मामला सीबीसीआईडी के हवाले कर दिया गया था। मगर सीबीसीआईडी द्वारा इस मामले में कुछ खास नहीं किया गया। तब हाईकोर्ट के निर्देश पर शासन ने पूरा मामला एसआईटी को सौंप दिया।

अब तक हुईं सात एफआईआर

अपनी प्रारंम्भिक जांच में ही एसआईटी को बडे़ फर्जीवाड़े के सबूत मिल गए। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक, हाथरस, एटा, अलीगढ़, मैनपुरी और आगरा के कई काॅलेजों में तय सीट से करीब 70 फीसदी ज्यादा मार्कशीट अवैध तरीके से जारी कर दी गईं। इसके अलावा बढ़ौत और मेरठ की डाइट परिसर में दर्जनों बीएड की फर्जी मार्कशीट पकड़ी गई थीं। इस मामले में एसआईटी ने सबसे पहले 2012 में पहली एफआईआर दर्ज की। एसआईटी इस मामले में अभी तक सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इस मामले में विवि के छह कर्मचारी फरार चल रहे हैं।

आरोपी ने बदला मकान

हैरानी वाली बात है कि आरोपी सुनील ने विवि में जो पता लिखा रखा है, उस उस पते पर पिछले पांच साल से लापता है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने आगरा में ही कहीं और अपना ठिकाना बना रखा है।

25 हजार फर्जी मार्कशीट

कालेज संचालकों ने करीब 25 हजार फर्जी मार्कशीट जारी की थीं। प्रत्येक छात्र से कालेज संचालकों ने डेढ़ से दो लाख रूपयोंकी वसूली की थी। जानकारों के मुताबिक, जाली मार्कषीट के बूते पर सैकड़ों लोगों ने उत्तर प्रदेश में शिक्षक की नौकरी भी प्राप्त कर ली है। एसआईटी के इस खुलासे के बाद से कॉलेज संचालकों के साथ ही नौकरी पाए हुए छात्रों में भी खलबली मची हुई है।

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