अम्‍बेडकर के सामने चुप रहे मोदी

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लखनऊ। अम्‍बेडकर महासभा पहुंचे पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की। यहां रखे उनके अस्थि कलश पर पुष्‍प चढ़ाए। अम्‍बेडकर महासभा में पीएम नरेन्‍द्र मोदी सिर्फ दस मिनट रुके। शांत रहे। कुछ भी नहीं बोले। हालांकि इस मौके पर उन्‍हें सुनने के लिए दलित समाज के काफी लोग जुटे थे। उनके साथ केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के राज्‍यपाल राम नाईक भी मौजूद थे।

अम्‍बेडकर महासभा

अम्‍बेडकर महासभा में सिर्फ 10 मिनट रुके पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के लिए अपने एक दिवसीय दौरे में लखनऊ के दो कार्यक्रमों में शिरकत करने के बाद
डॉ भीमराव अंबेडकर महासभा पहुंचे। विधानभवन के सामने स्थित अम्‍बेडकर महासभा में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर कोपुष्पांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने यहां डॉ अम्बेडकर की अस्थि कलश पर पुष्प चढ़ाए । महासभा के पदाधिकारियों ने पीएमको अम्‍बेडकर की कांस्‍य प्रतिमा भेंट की। पीएम सिर्फ दस मिनट ही वहां पर रुके। वह कुछ भी नहीं बोले। उनके साथ उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाइक और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी थे।

अम्‍बेडकर महासभा 1

बीबीएयू में बोले मोदी गुरुकुल से चली आ रही दीक्षांत समारोह की परंम्‍परा

बीबीएयू में पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि दीक्षांत समारोह का पहला उल्‍लेख त्रेतायुग में आता है जब गुरुकुूल में शिक्षा दी जाती थी। तब से दी‍क्षांत समारोह की परंम्‍परा है। शिक्षा वो जो करणीय और अकरणीय में भेद बता सके। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा को लेकर हर कोइ अपनी सोच के दायरे से सोचता होगा। क्‍या कभ्‍ाी सोचा है जो किताब पढ़ रहे थे आखिर किस ने वह किताब तैयार की है। कोई तो उस किताब के पन्‍ने टाइप करता होगा। किताब छापते वक्‍त कोई गलती न रह जाए‍ जिससे किसी का भविष्‍य खराब हो जाए वो भी वो आदमी सोचता है जिसने कभी कॉलेज नहीं देखा होगा।

जब हम कुछ बनते हैं तो पूरे समाज का योगदान होता है

पीएम ने कहा कि जब पूरे समाज का योगदान होता है तब हम कुछ बनते हैं। किसी के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत ही बाबासाहेब को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी। कुछ भी देना पाना मुश्किल नहीं लेकिन इरादा करना मुश्किल होता है। आप कुछ करने के इरादे से निकलते हैं तो क्‍या बनते हैं यहछोड दिया जाए तो कुछ भी कर भी सकते हैं। जिंदगी से जूझना सीखना चाहिए। हर महापुरुष को हर चीज सरलता से नहीं मिली है। ज्‍यादातर वो लोग होते हैं जिनके नसीब में पत्‍थर पर ही लकीर खीचंना होता है।

असफलता ही सफलता का मूलमंत्र है

प्रधानमंत्री ने मेधावियों से कहा कि सही मायने में जीवन की सही शुरुआत अब होनी है। अभी तक आप प्रोडक्टिव थे। यहां किसी बात की जरूरत पर कोई न कोई हाथ रखने वाला था। यह सब अब समाप्‍त हो जाएगा। अब पूरी दुनिया आपकी तरफ देख रही है। मां बाप भी सोचते हैं अब क्‍या कर रहे हों। जीवन की सही कसौटी अब है। अब टीचर की बात सही लगने लगेगी। खुद से यह कहना होगा कि मैं अपने आपको निराशा में डूबने नहीं दूंगा। विफलताओं से परेशान नहीं हूंगा। असफल्‍ता ही सफलता का मूलमंत्र है। यही सोच ही फर्टीलाइजर का काम करती है। चिंता तब होती है जब कोई असफलता से सीखने को तैयार नहीं होता। असफलताओं से भी ऊर्जा कैसे प्राप्‍त होती है यह भी अलग अनुभव है। 21 वीं सदी भारत के लिए इसलिए है क्‍योंकि महान देश है। देश जवान है इस देश के सपने भी जवान है। नौजवान हमारे लिए अनमोल है। जब यह खबर मिलती है कि मेरे देश का नौजवान आत्‍महत्‍या को मजबूर है तो दुख होता है।

 


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