अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू, राष्ट्रपति ने दी कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी

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अरुणाचल प्रदेशनई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। कैबिनेट के प्रस्‍ताव को राष्‍ट्रपति ने मंगलवार की शाम को मंजूरी दे दी। अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों से उपजे संवैधानिक संकट के चलते केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।

अरुणाचल प्रदेश में पिछले साल से बना है राज‍नीतिक संकट

अरुणाचल प्रदेश में पिछले साल दिसंबर से राजनीतिक संकट बना हुआ है। 16 दिसंबर को राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के 21 बागी विधायकों ने सरकार का साथ छोड़ दिया। विधानसभा में कांग्रेस के पास 42 विधायक थे। इन बागी विधायकों ने 11 भाजपा और दो स्वतंत्र विधायकों के साथ मिलकर विधानसभा से बाहर एक बैठक कर विधानसभा अध्यक्ष नाबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित कर दिया।

इसके एक दिन बाद एक स्थानीय होटल में बैठक कर विधायकों के मुख्यमंत्री नाबाम तुकी को सत्ता से बेदखल करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। हालांकि गुवाहाटी हाई कोर्ट ने दखल करते हुए दोनों फैसलों को अवैध ठहरा दिया। केंद्रीय कैबिनेट ने इस संवैधानिक संकट में विधानसभा को निलंबित रखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी।

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने पर राज्य के मुख्यमंत्री नाबाम तुकी ने केंद्र सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। कांग्रेस की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई है। कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी।

अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर ने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की बात कही थी। राज्य में स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि कई बार राजभवन तक का घेराव किया गया। यहां तक कि प्रदेश सरकार ने राज्यपाल द्वारा कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर लिखे पत्रों तक का जवाब नहीं दिया था।

सूत्र बताते हैं कि राज्य में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के चलते संवैधानिक संकट भी उत्पन्न हो गया। संविधान के अनुच्छेद 174 के मुताबिक, राज्य विधानसभा के किसी सत्र के आखिरी दिन और अगले सत्र के पहले दिन के बीच छह महीने से अधिक की अवधि का अंतर नहीं होना चाहिए। यह छह महीने की अवधि 21 जनवरी 2016 को समाप्त हो रही थी। चूंकि राज्य विधानसभा परिसर को राज्य प्रशासन द्वारा सील करने के बाद बागी कांग्रेस विधायकों और भाजपा विधायकों की तरफ से बाहर बुलाई गई सदन की बैठक को अदालत ने अमान्य करार दिया था, इसलिए इसे विधानसभा का सत्र नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में 21 जनवरी के बाद अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई। इस वजह से केंद्र सरकार को राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी पड़ी।

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