अरुणाचल प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने दिया केंद्र और गवर्नर को नोटिस

0

अरुणाचल प्रदेशनई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर के वकीलों से 15 मिनट के अंदर ई मेल के जरिए रिपोर्ट मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और गवर्नर को नोटिस जारी कर दिया। अब इस मामले पर अगली सुनवाई सोमवार को होगी। अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

अरुणाचल प्रदेश में क्‍यों लगाई इमरजेंसी

सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई कि राज्यपाल की तरफ से कोर्ट को सारी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। कोर्ट ने कहा, किन हालातों में इमरजेंसी लगाई गई, यह जानकारी हमारे लिए जरूरी है। राज्यपाल के वकील के एक दिन का वक्त मांगने पर कोर्ट ने कहा कि इसके लिए आपको ईटानगर जाने की जरूरत नहीं, ई-मेल से मंगाइये।

याचिका में कई कमियां

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि मामला कोर्ट नंबर 3 में है। इसकी सुनवाई जस्टिस केहर की बेंच करेगी। यह भी कहा जा रहा है कि कोर्ट याचिका पर सुनवाई को तो राजी है लेकिन इसमें कई खामियां हैं। जस्टिस केहर ने कहा कि अरुणाचल के मुद्दे पर कांग्रेस की याचिका पर कई खामियां हैं। यहां तक की मामले की सुनवाई को लेकर कोर्ट की निर्धारित फीस भी नहीं भरी गई। फीस में करीब 800 रुपये कम हैं।

पिछले साल से बना है राज‍नीतिक संकट

अरुणाचल प्रदेश में पिछले साल दिसंबर से राजनीतिक संकट बना हुआ है। 16 दिसंबर को राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के 21 बागी विधायकों ने सरकार का साथ छोड़ दिया। विधानसभा में कांग्रेस के पास 42 विधायक थे। इन बागी विधायकों ने 11 भाजपा और दो स्वतंत्र विधायकों के साथ मिलकर विधानसभा से बाहर एक बैठक कर विधानसभा अध्यक्ष नाबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित कर दिया।

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति को भेजा था प्रस्ताव

अरुणाचल प्रदेश में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। मंगलवार शाम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसकी मंजूरी दे दी। केंद्रीय कैबिनेट ने रविवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।

मुख्‍यमंत्री ने राज्यपाल को बताया था बीजेपी एजेंट

इससे पहले दिसंबर में गहराए सियासी संकट पर मुख्यमंत्री तुकी ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा बीजेपी एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ही सरकार गिराने के लिए कांग्रेस के विधायकों से बगावत कराई है।

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने से नाराज मुख्यमंत्री ने कहा कि वह केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमें पता था कि वे ऐसा करेंगे क्योंकि उनकी धारणा ही ऐसी है। हम डरेंगे नहीं। कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। हमारे साथ 31 विधायक हैं।

loading...
शेयर करें