भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम एनपीए रिकवरी में बाधक : जेटली

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नई दिल्ली| भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम (पीसीए) के प्रावधान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए), या बुरे ऋण की वसूली प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। ये प्रावधान त्रुटिपूर्ण और भ्रष्ट निर्णय में अंतर नहीं कर पाते।

अरुण जेटली

अरुण जेटली बोले,  भ्रष्ट निर्णय पर हर हाल में दंड होना चाहिए

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा, “मैं एनपीए के मौजूदा ढेर को सुलझाने के लिए आप से कह सकता हूं, यह एकमात्र समस्या है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के समक्ष चुनौती पैदा कर रहा है।”

जेटली ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा आयोजित महालेखाकारों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “आज निजी क्षेत्र के किसी बैंक के पास एनपीए को सुलझाने की अपनी आजादी है, और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी 1988 पीसीए अधिनियम के प्रावधानों को लेकर परेशान हैं।”

जेटली ने कहा, “मैं समझता हूं कि इस अंतर को बताने की जरूरत है। भ्रष्ट निर्णय पर हर हाल में दंड होना चाहिए, त्रुटिपूर्ण निर्णय का आप बाद में सिर्फ विश्लेषण कर सकते हैं।”

वित्तमंत्री ने कहा कि पीसीए के मौजूदा प्रावधान जांच अधिकारी को यह तय करने के लिए ढेर सारे विशेषाधिकार देते हैं कि कोई अर्जित लाभ उचित था या अनुचित।

जेटली ने कहा, “लोग धन अर्जित करने के लिए सरकार के साथ लेन-देन करते हैं.. इसलिए लेन-देन में लाभ अनिवार्य है। यह लाभ उचित है, या अनुचित, इस बात को तय किया जाना चाहिए। यह किसी नीति नियंता को, खासतौर से लोकसेवक को एक बहुत ही कठिन परिस्थिति में डाल देता है।”

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