आप भी जानिए इस बार के बजट में क्या कुछ हो सकता है…

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नयी दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार करीब-करीब आधा सफर कर चुकी है लेकिन आम आदमी से लेकर अर्थव्यवस्था की सेहत में कोई खास बदलाव अभी तक देखने को नहीं मिला है। इन स्थितियों में सोमवार को संसद में आने वाला आम बजट वो बुनियाद हो सकती है जिस पर अच्छे दिनों की इमारत खड़ी होगी। लेकिन इतने बड़े बजट में आपको किन बड़ी बातों पर फोकस करना चाहिए? बजट में कौन से बड़े फैसले हो सकते है?  इस बजट में टैक्सपेयर को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। सरकार बजट में इनकम टैक्स से छूट की सीमा करीब 40000 रुपए तक बढ़ा सकती है। सरकार छोटे टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए ये अहम कदम उठा सकती है। इससे अर्थव्यवस्था की सेहत ठीक रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

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अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने पर फोकस

अर्थव्यवस्था की सेहत पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है इनकम टैक्स का। अगर इनकम टैक्स का दायरा 40 हजार तक बढ़ता है तो 2.5 लाख रुपए के बजाय 2.9 लाख रुपए पर टैक्स देना होगा। वहीं 2.9 लाख रुपए से 5.4 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी टैक्स लग सकता है। 5.4 लाख रुपये से 10 लाख रुपए तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि ऊपरी स्लैब में छूट की सीमा बढ़ने की संभावना कम है और 10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। माना जा रहा है कि सरकार की नयी टैक्स दरों से टैक्स पेयर को 4000-8000 रुपए तक की बचत होगी। बजट में 60 और 80 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी छूट की सीमा बढ़ सकती है। फिलहाल 60 साल से 80 साल की उम्र के लिए छूट की सीमा 3 लाख रुपए है। 60 साल से 80 साल की उम्र के लिए छूट की समा 3.4 लाख रुपये की जा सकती है। वहीं बजट में 80 साल से ऊपर की उम्र के लिए छूट की सीमा 5.4 लाख रुपये की जा सकती है। फिलहाल 80 साल से ऊपर की उम्र के लिए छूट की सीमा 5 लाख रुपये है।

टैक्सपेयर को राहत देना भी उद्देश्य

सूत्रों की मानें तो छोटे और मंझौले टैक्सपेयर पर बोझ कम करने की कोशिश को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में एक अहम बैठक हुई। बताया जा रहा है कि सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी कर टैक्सपेयर को दी जानेवाली छूट की भरपाई करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही कई प्रोडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि कर भरपाई होगी। सरकार की दलील है कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद टैक्स पेयर को राहत देना जरूरी है। साथ ही बढ़ती महंगाई भी टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के पीछे बड़ी वजह हो सकती है।

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कॉरपोरेट टैक्स के घटने की उम्मीद

पिछले बजट में सरकार ने कहा था कि कॉरपोरेट टैक्सों को धीरे-धीरे 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाएगा। ऐसी संभावना है कि इस बजट से कॉरपोरेट टैक्स को घटाने की शुरुआत की जा सकती है। कॉर्पोरेट टैक्स में करीब 1 फीसदी की कटौती संभव है। कॉर्पोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 29 फीसदी किया जा सकता है। चार साल में कॉर्पोरेट टैक्स 25 फीसदी पर लाने की योजना भी आ सकती है। इस बजट में टैक्स रियायतें किस्तो में खत्म करने की शुरूआत भी हो सकती है और मशीन, प्लांट, रिसर्च पर टैक्स रियायतें हटाई जा सकती हैं।

सर्विस टैक्स बढ़ने की संभावना

आम जनता को अचानक जोर का झटका न लगे इसके लिए सरकार अभी से सर्विस टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है। इस बजट में जीएसटी की तरफ कदम बढ़ने की कोशिशों के तहत सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी तक किया जा सकता है। टेलिफोन बिल और रेस्टोरेंट में खाना-पीना महंगा हो सकता है। एक्साइज ड्यूटी की रियायतें कम की जा सकती है और कुछ नए प्रोडक्टस भी एक्साइज ड्यूटी के दायरे में आ सकते हैं। वहीं डिब्बाबंद खाने पर भी एक्साइज ड्यूटी बढ़ सकती है। पास्ता, आईस्क्रीम बिस्किट जैसे आईटम महंगे हो सकते हैं।

 
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अपना घर देखने वालों को मिल सकती है राहत

घर का सपना देखने वाला हर शख्स इस बजट को बड़े गौर से देखेगा। सूत्र बताते हैं कि इस बजट में सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए बड़े एलान कर सकती है। खासकर रियल्टी सेक्टर को बड़ा पुश दे सकती है। सरकार होमलोन ब्याज पर भी टैक्स बढ़ा सकती है। होम लोन पर टैक्स छूट 3 लाख रुपये हो सकती है। फिलहाल होम लोन पर 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है। सूत्रों से मिली खबरों के मुताबिक इस बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्टर मिल सकता है। जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हाउसिंग को इंफ्रा स्टेटस मिल सकता है साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग में डाला जा सकता है। चूंकि सरकार ने संकेत दिए हैं कि ये बजट गरीबों की उन्नति, किसानों की समृद्धि और युवाओं को रोजगार देने वाला होगा। ऐसे में माना जा सकता है कि इस बार के बजट का फोकस गांव और किसान होंगे। इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खास पैकेज का एलान हो सकता है। भूमिहिन किसानों को किसान का दर्जा भी मिल सकता है। मनरेगा के तहत ज्यादा खर्च की योजना आ सकती है।

बैंकिंग सेक्टर को किया जाएगा बूस्ट

अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने में बैंक बड़ी भूमिका निभाते हैं लेकिन मौजूदा समय में देश के बैंकों की हालत काफी खराब है। देश के 39 लिस्टेड बैंकों का कुल एनपीए 4.38 लाख करोड़ रुपए हो चुका है। अगर इस बजट में बैंकों को बचाने के लिए कुछ नहीं किया गया तो काफी देर हो जाएगी। वीआईपी बैंक डूबे तो पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा होगा। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार इस बजट में बैंकों को बूस्टर देगी। 2016-17 में पीएसयू बैंकों में 25 हजार करोड़ रुपये निवेश की योजना है। इस निवेश को बढ़कर 35 हजार करोड़ किया जा सकता है। बैड बैंक या नेशनल एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी भी बनाई जा सकती है। नेशनल एआरसी के लिए अलग से पूंजी की ज़रूरत होगी। सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी भी हो सकती है। बैंकों के चेयरमैन और सीईओ की नियुक्ति के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो की घोषणा भी हो सकती है।

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