अर्द्धकुंभ हरिद्वार में नहीं देखी होगी इतनी सफाई और खूबसूरती

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कीर्ति पंत

हरिद्वार। अर्द्धकुंभ हरिद्वार को शुरु हुए पूरे 19 दिन हो गये हैं इस दौरान एक स्नान भी हो चुका है। इसके अलावा भी यहां श्रद्धालुओं का आना लगा हुआ है। हिन्दू परम्पराओं के मुताबिक, हरिद्वार में पांच तीर्थ गंगाद्वार (हर की पौडी), कुश्वर्त (घाट), कनखल, बिलवा तीर्थ (मनसा देवी), नील पर्वत (चंडी देवी) हैं। पूरे हरिद्वार जिले में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के देखने के लिये बहुत कुछ है। अर्द्धकुंभ हरिद्वार के दिव्य नजारे दिखाने के लिये आपको भी उन खास स्थानों की जानकारी देते हैं जहां जाकर आपको दिव्य अनुभूति जरूर होगी।

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अर्द्धकुंभ हरिद्वार में इन स्थानों पर जरूर जायें

हर की पौडी

हर की पौडी का पवित्र घाट राजा विक्रमादित्य ने पहली शताब्दी ईसा पूर्व में अपने भाई भ्रिथारी की याद में बनवाया था। मान्यता है कि भ्रिथारी हरिद्वार आया था और उसने यहां पतित-पावनी गंगा के तटों पर कठोर तपस्या की थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके भाई ने उसके नाम पर यह घाट बनवाया, जो बाद में हरी-की-पौड़ी कहलाया। ब्रह्मकुंड हर की पौड़ी का सबसे पवित्र घाट है।

चंडी देवी मंदिर

चंडी देवी मंदिर हरिद्वार से करीब 6 किमी दूर है, जबकि चंडीघाट से यह मंदिर सिर्फ 3 किमी दूर है। गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर ‘नील पर्वत’ की चोटी पर चंडी देवी का मंदिर है। 1929 में कश्मीर के राजा सुचत सिंह ने इस मंदिर को बनवाया था। स्कन्द पुराण की एक कथा के मुताबिक, स्थानीय राक्षस राजाओं शुम्भ-निशुम्भ के सेनानायक चंड-मुंड को देवी चंडी ने यहीं मारा था, जिसके बाद इस स्थान का नाम चंडी देवी पड़ा।

मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर हरिद्वार से सिर्फ आधे किमी की दूरी पर है। बिलवा पर्वत के शिखर पर मनसा देवी का मंदिर है। मनसा देवी का शाब्दिक अर्थों में मतलब मन की इच्छा (मनसा) पूर्ण करना है। मान्यता है कि जो भी भक्त मां के चरणों में आस्था के साथ नमन करता है उसकी सभी इच्छायें माता जरूर पूर्ण करती हैं।

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माया देवी मंदिर

माया देवी का मंदिर हरिद्वार से महज आधा किमी की दूरी पर है। 11वीं शताब्दी में बना माया देवी का मंदिर हरिद्वार के अधिष्ठात्री ईश्वर का प्राचीन मंदिर है। और यह एक सिद्धपीठ भी माना जाता है। मान्यता ये भी है कि इसी स्थान पर देवी सती की नाभि और हृदय यानी दिल गिरा था।

भीमगोडा टैंक

हर की पौडी से भीमगोडा टैंक करीब 1 किमी दूर है। कहा जाता है कि जब पांडव हरिद्वार के रास्ते हिमालय की ओर कूच कर रहे थे, तो महाबली भीम ने अपने घुटने से जमीन में यह टैंक बनाया था।

सप्त ऋषि आश्रम और सप्त सरोवर

कहा जाता है कि सात ऋषियों की तपस्या से प्रसन्न होकर पतित पावनी गंगा ने इसी स्थान पर खुद को 7 धाराओं में बांट लिया था। इसके बाद ही इस स्थान का नाम सप्त ऋषि आश्रम या सप्त सरोवर पड़ा।

 
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पहाड़ शिवलिंग

यह कनखल के हरिहर आश्रम में स्थित है। कहा जाता है कि यहां पर स्थित शिवलिंग का वजन करीब 150 किलो है। रुद्राक्ष के पेड़ इस स्थान के मुख्य आकर्षण हैं। और यहीं से लोग विभिन्न मुखों के रुद्राक्ष लेने आते हैं।

दक्ष महादेव मंदिर

दक्ष महादेव मंदिर हरिद्वार से करीब चार किमी दूर है। ये मंदिर काफी पुराना है और भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस स्थान पर माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया था।

 

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