असहिष्णुता : करण जौहर के समर्थन में उतरे केजरीवाल कहा, मन की बात कहना बहादुरी

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नई दिल्ली फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर करन जौहर ने असहिष्णुता पर बयान दिया जिसके बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। करन ने ये बात जयपुर में चल रहे लिटरेचर फेस्टिवल में कही। करन ने कहा है कि मन की बात कहना भारत में सबसे मुश्किल है। उन्होंने कहा कि फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन भारत में सबसे बड़ा जोक है और डेमोक्रेसी उससे भी बड़ा मजाक है। जिसके बाद काफी लोगों ने इस असहिष्णुता  के बयान का विरोध किया। अब दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल करण जोहर के समर्थन में आ गए हैं।

असहिष्णुता

असहिष्णुता पर बोलना करण की बहादुरी

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा है कि करन जौहर बिल्कुल सही हैं। इस देश में केवल एक इंसान सार्वजनिक रूप से अपने मन की बात कर सकता है। कोई और नहीं कर सकता। करन के इस बयान की प्रशंसा बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट ने भी की है। महेश भट्ट ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि असहिष्णुता पर शाहरूख और आमिर के साथ जो हुआ उसे देखने के बाद भी इस मुद्दे पर अगर करन ने कुछ कहा है तो यह उसकी बहादुरी को दिखाता है।

लीगल नोटिस का डर रहता है

आपको बता दें कि लिटरेचर फेस्टिवल में करन ने कहा कि मन की बात कहना भारत में सबसे मुश्किल है। उन्होंने कहा, ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन भारत में सबसे बड़ा जोक है और डेमोक्रेसी उससे भी बड़ा मजाक है। मुझे तो लगता है जैसे हमेशा कोई लीगल नोटिस मेरा पीछा करता रहता है। किसी को पता नहीं कब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाए।’ करन जौहर ने यहां अपनी जीवनी ‘एन अनस्यूटेबल ब्वॉय’ के बारे में लेखिका शोभा डे और जीवनी लिखने वाली पूनम सक्सेना से बातचीत की। उन्होंने समलैंगिकता से लेकर बोलने की आजादी, फिल्मों और शाहरुख खान के साथ अपने संबंधों को लेकर कई अलग-अलग विषयों पर अपने विचार रखे।

असहिष्णुता पर बयान देकर विवादों में आ चुके हैं ये सेलिब्रिटीज

– नवंबर में ही शाहरुख खान ने देश के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। शाहरुख ने कहा था, ”देश में असहिष्णुता बढ़ रहा है। ऐसे में, अगर मुझे कहा जाता है तो एक सिम्बॉलिक जेस्चर के तौर पर मैं भी अवॉर्ड लौटा सकता हूं।”

– नवंबर में आमिर ने एक मीडिया ग्रुप के अवॉर्ड फंक्शन में कहा, ‘देश का माहौल देखकर एक बार तो पत्नी किरण ने बहुत बड़ी और डरावनी बात कह दी थी। किरण ने पूछा था कि क्या हमें देश छोड़ देना चाहिए? किरण बच्चे की हिफाजत को लेकर डर महसूस कर रही थीं।‘ इस बयान के बाद वे विवादों में आ गए। दो दिन बाद उन्हें सफाई भी देनी पड़ी कि वे देश छोड़कर नहीं जाने वाले।

– दिसंबर में लखनऊ लिटरेचर फेस्ट में शबाना ने कहा था, “1992 में मुझे पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि मैं मुसलमान हूं। हर कोई कहने लगा- “ओह, आप तो मुस्लिम हैं। इस देश में मजहब को ही पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ये इंडिया की पहचान नहीं है। जब तक इंसान हैं, तब तक इन्टॉलरेंस रहेगा। लेकिन जब यह लॉ एंड ऑर्डर की प्रॉब्लम बन जाए तो सरकार को इससे निपटना चाहिए।”

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