सब हारे तो अब आईआईटी के सहारे….

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कानपुर। नमामि गंगा योजना पर शहर में कोई सार्थक पहल न होने पर अब इसकी कमान आईआईटी कानपुर के हाथों में होगी। टेनरी वेस्ट और शहर के सीवेज को गंगा में जाने से रोका जायेगा। आईआईटी कानपुर तीन माह में इसका डिजाइन तैयार करके केंद्र सरकार को भेजेगा। गंगा को लेकर जिला प्रशासन, केडीए, नगर निगम, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जलकल विभाग के अफसरों को इकट्ठा करके आईआईटी प्रोफेसर विनोद तारे ने उनके प्रयासों व संसाधनों को समझा। प्रोफेसर ने कहा कि गंगा को साफ़ करने की शुरुआत उसमें गिरने वाले नालों से करनी होगी। सबसे पहले सीसामऊ नाले को ठीक किया जायेगा। प्रोफेसर ने बताया कि टेनरी से निकल रहे वेस्टेज को ट्रीट करके उसमें मौजूद क्रोमियम को दोबारा टेनरी के उपयोग लायक बनाया जायेगा। इस पानी को दोबारा टेनरी वालों को ही दिया जायेगा।

आईआईटी कानपुर

आईआईटी कानपुर में सभी मिलकर तैयार करेंगे डीपीआर

ऐसा पहली बार होगा जब सभी विभाग मिलकर डीपीआर तैयार करेंगे। अभी तक सभी विभाग अलग अलग अपना डीपीआर तैयार करते रहे हैं। जिससे इस कार्य में कोई सार्थक प्रगति नहीं हो पा रही थी। इसीलिए अब योजना बनाकर काम किया जायेगा।

यह हैं मुख्य समस्याएं

30 नालों से प्रतिदिन 544.69 एमएलडी सीवरेज गंगा में जा रहा है। जिसमे सिर्फ 90 एमएलडी का ही शोधन हो पाता है। नदियो से भी गंदगी आती है। टेनरी जा कचरा भी जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन ठीक नहीं है।

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी

आईआईटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर से पूरी तरह से निजात मिलने की उम्मीदें बढ़ गयी हैं। रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के नैनो बायो टेक्नोलॉजी केंद्र ने इस दिशा में शुरुआती कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों ने बैंडेज जैसा एक पॉलीमर नैनो फाइबर ईजाद किया है, जिससे फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओं को जड़ से नष्ट किया जा सकेगा। प्रयोगशाला में मिली कामयाबी से उत्साहित वैज्ञानिक अब इसका पशुओं पर परीक्षण करने की तैयारी कर रहे हैं। शोध टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. गोपीनाथ पकीरीसामी ने बताया कि सरकार से परीक्षण को आगे बढ़ाने की अनुमति लेनी बाकी है। उन्होंने बताया कि फेफड़ों के कैंसर के शोध को ‘इंटरनेशनल जनरल एप्लाइड मैटीरियल्स एंड इंटरफेस’ में प्रकाशित किया जा चुका है।

पूना से मंगाई गई कोशिका

टीम से जुड़े एक शोध छात्र का कहना है कि बैंडेज की तरह नजर आने वाली पॉलीमर नैनो फाइबर आकार में 1.5 सेमी लंबी और 1.5 सेमी चौड़ी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पॉलीमर नैनो फाइबर से कैंसर कोशिकाएं तो नष्ट हो जाएंगी, लेकिन स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कैंसर के मरीजों को दी जाने वाली कीमोथैरेपी से शरीर पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ते हैं।

शोध के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रयोग के लिए पूना स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस’ से खास तौर पर कैंसर कोशिका मंगाई गई। इस कोशिका को इंक्यूबेटर में विशेष तौर पर विकसित किया गया। जब कोशिकाओं की संख्या लाखों में पहुंच गई तब इनको पॉलीमर नैनो फाइबर पर डाला गया। परिणामों ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। तीन दिन में करीब एक लाख कैंसर कोशिकाएं मृत पाई गईं। इसके बाद चौथे दिन यह देखा गया कि क्या कैंसर काशिकाओं की संख्या में फिर से वृद्धि हुई है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था। डॉ. गोपीनाथ पकीरीसामी के अनुसार शरीर के कैंसरग्रस्त भाग में इसे आपरेशन कर डाला जाएगा। इसका एक फायदा यह भी है कि इसे बाद में भी निकालने की जरूरत नहीं है, क्यों इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

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