आईएस की सोशल मीडिया पर सक्रियता को काबू में करेगी सरकार

नई दिल्ली। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने सोशल मीडिया के जरिए अपना आतंक का नेटवर्क भारत में फैलाने की कोशिश की है। भारत सरकार को इसकी खुफिया जानकारी हासिल हो चुकी है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि आईएस सोशल मीडिया के जरिए देश में अपने आतंक का नेटवर्क चलाने की कोशिश कर रहा है। आईएस के इसी नेटवर्क को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने गंभीर कोशिशें शुरू कर दी हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक सेल का गठन किया है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कई इंटेलिजेंस और सिक्यॉरिटी एजेंसी के साथ 13 राज्यों के डीजीपी के साथ मीटिंग कर आईएस के बढ़ते प्रभाव पर नजर बनाए रखने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की। अब तक 23 भारतीय आईएस में भर्ती हुए हैं और इनमें से 6 की मौत भी हो चुकी है। लगभग 150 भारतीयों को आईएस से जुडने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था.

आईएस का सोशल नेटवर्क फैलने से रोकेगी सरकार

इसके माध्‍यम से सोशल मीडिया पर आतंकी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करने के आईएस के मंसूबों पर नियंत्रण रखा जाएगा। यह सेल आईएस की गतिविधियों के प्रसार करने वाले और इनकी चपेट में आने वालों पर रियल टाइम नजर रखेगा। इस सेल ने काम करना शुरू भी कर दिया है। जानकार सूत्रों के अनुसार ऐसे लोगों को ट्रैक करने के लिए 100 से अधिक कैचवर्ड बनाए गए हैं, जिनके बदौलत फेसबुक और टि्वटर पर ऐसे कंटेंट को हमेशा ट्रैक किया जाएगा।

साइबर एक्‍सपर्ट देंगे होम मिनिस्‍ट्री को रिपोर्ट

इस सेल में साइबर एक्सपर्ट को रखा भी गया है जो ऐसे कॉन्टेंट के ऑरिजिन वाले सेंटर के साथ उसके प्रसार पर भी नजर रखेंगे। यह हर हफ्ते अपनी रिपोर्ट होम मिनिस्ट्री को देंगे और बीच में किसी संदिग्ध कॉन्टेंट या लोगों की बातों पर संदेह होने पर तुरंत सुरक्षा एजेंसी को आगाह करेंगे। दरअसल अब तक आईएस से जुड़ने के आरोप में जितने भी भारतीय युवा पकड़े गए हैं, उनमें सबसे कॉमन फैक्टर था कि वे सोशल मीडिया पर ऐक्टिव थे।

होम मिनिस्‍ट्री ने राज्‍यों को किया अलर्ट

 

आईएस के खतरे और उसके प्रचार प्रसार को लेकर होम सेक्रटरी ने उन राज्यों के अधिकारियों को विशेष अलर्ट करते हुए दूसरे सटे राज्यों को भी इनपुट लेने को कहा। साथ ही इस्लामिक आतंकवाद और इनके सिद्धांत से प्रभावित होने वाले युवाओं का पहले काउंसिलिंग करने को भी कहा गया, ताकि इसका प्रसार न हो सके। सरकार का मानना है कि अगर इस तरह सेल तब काम कर रहा होता तो ऐसे लोग रेडार में आ जाते और उन्हें समय पर पकड़ा जा सकता था। सूत्रों के अनुसार अब तक सबसे अधिक आईएसआईएस गतिविधियों की सूचना जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और तेलंगाना से सामने आई है। इसके अलावा यूपी से भी बीच-बीच में ऐसी खबरें आईं हैं।

होम मिनिस्ट्री ने ली मीटिंग

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