निर्भया गैंगरेप मामले का यह दोषी आतंकियों के टच में

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नई दिल्ली। दिल्ली में वर्ष 2012 में हुआ निर्भया गैंगरेप एक ऐसा मामला है जिसकी टीस आज भी कई लोगों के दिलों में मौजूद है। लेकिन इस टीस के बावजूद इस मामले का एक आरोपी आज आजादी में घूम रहा है। हम बात कर रहे हैं इस मामले के उस आरोपी की जिसको नाबालिग होने की वजह से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने मात्र तीन साल की सजा सुनाई थी। लेकिन अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने इस दोषी के बारे में एक सनसनी जानकारी दी है।

आईबी

आईबी की निर्भया काण्ड के इस आरोपी पर नजर

बताया जा रहा है कि निर्भया काण्ड का यह नाबालिग आरोपी अब आतंकियों के संपर्क में है। आईबी ने अपने एक नए अलर्ट में चेतावनी देते हुए बताया है दोषी नाबालिग अब आतंकियों के संपर्क में है। हालांकि वह अब नाबालिग भी नहीं रह गया है बल्कि 21 साल का हो गया है।

यह पहली बार नहीं है। आईबी ने इसके पहले भी इस बारे में जानकारी दी थी। इसके पहले आईबी ने अलर्ट करते हुए राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश के बदायूं में रहने वाले इस आरोपी पर नजर रहने की सलाह दी थी।

इस बात की जानकारी देते हुए आईबी के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में हमें उसके बारे में कुछ खास जानकारी मिली है। हमने स्थानीय अधिकारियों से उस पर करीबी नजर बनाए रखने को कहा है।

2015 में जुवेनाइल होम से उसकी रिहाई से पहले यह दोषी जुवेनाइल होम में उस कश्मीरी लड़के के साथ रहा था जिसे दिल्ली हाईकोर्ट में वर्ष 2011 में हुए एक ब्लास्ट केस का आरोपी माना जा रहा है। यह रेपिस्ट और कश्मीरी लड़का एक ही कमरे में रह रहे थे। बताया जाता है कि कश्मीरी लड़के ने उसे आतंकी संगठनों से जुड़ने को उकसाया था। इस बात की जानकारी भी आईबी ने ही दी थी।

बदायूं के वरिष्ठ एसएसपी सुनील सक्सेना ने बताया कि अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हमसे जो भी जानकारी उसके बारे में मांगी जाएगी, वो हम वह उपलब्ध कराएंगे।

क्या है निर्भया गैंगरेप मामला

आपको बता दें कि निर्भया गैंगरेप एक ऐसा मामला था जिसने पूरे देश में इस बलात्कार जैसे अमानवीय अपराध के खिलाफ लोगों में जागरूकता भर दी थी और लोग इस मामले में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। इस मामले में छह लोगों ने एक पैरामेडिकल छात्रा को चलती बस में न सिर्फ अपनी हवस का शिकार बनाया था बल्कि उन्होंने इस छात्रा के साथ इंसानियत की सारी हदे पार करते हुए बहुत ही हैवानियत भरा कृत्य किया था। बाद में इस छात्रा ने सिंगापुर के एक अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली थी।

देश के अलग अलग हिस्सों में सड़कों पर लोगों का जनसैलाब देखकर उस समय तो यही लग रहा था कि इस मामले के सभी आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई जायेगी लेकिन इस मामले के छह आरोपियों में से एक आरोपी ऐसा भी था जो उस वक्त नाबालिग था। कोर्ट ने बाक़ी को तो फांसी की सजा सुना दी थी लेकिन नाबालिग साबित होने की वजह से इस दोषी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बाल सुधार गृह में तीन साल की सजा सुनाई थी।

बीते वर्ष इस नाबालिग दोषी ने अपने तीन साल पूरे कर लिए थे और जेल से रिहा हो गया था। हालांकि इसकी रिहाई के खिलाफ भी कई प्रदर्शन देंखने को मिले थे। इस मामले की भुक्तभोगी मृत पीडिता के माता-पिता ने भी दोषी के रिहाई के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि तत्कालीन नियम के कारण कोर्ट ने यह याचिका रिहा कर दिया था।

 

 

 

 

 

 

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